Building Tilt: गुरुग्राम में मकान की नींव की खुदाई से 5 मंजिला इमारत झुकी, दो क्रेनों के सहारे रोकी गई इमारत
सुशांत लोक-1 में बेसमेंट की गहरी खुदाई के दौरान बरती गई लापरवाही से बड़ा हादसा टला; आसपास के तीन मकान खाली कराए गए, प्रशासन रख रहा है पल-पल की नजर

Building Tilt/गुरुग्राम
गुरुग्राम के पॉश इलाके सुशांत लोक-1 में लापरवाही की एक बड़ी तस्वीर सामने आई है, जहाँ पड़ोसी प्लॉट में नींव की गहरी खुदाई के चलते एक निर्माणाधीन 5 मंजिला इमारत एक तरफ झुक (Building Tilt) गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर आसपास के मकानों को खाली करा लिया है, वहीं इमारत को फिलहाल दो बड़ी क्रेनों के सहारे रोका गया है।
Building Tilt : क्या है पूरा मामला?
यह घटना सुशांत लोक-1 के ब्लॉक-सी (प्लॉट नंबर 1770) की है। यहाँ प्लॉट मालिक अंशुल कुमार अपने प्लॉट पर निर्माण कार्य के लिए करीब 5 फीट गहरी नींव खुदवा रहे थे। आरोप है कि ठेकेदार और जेसीबी चालक ने बगल में बनी 5 मंजिला इमारत की नींव से बिल्कुल सटाकर मिट्टी खोद दी। बिना किसी तकनीकी सुरक्षा या तालमेल के की गई इस खुदाई के कारण मिट्टी खिसक गई, जिससे यह विशाल इमारत अचानक 2 से 2.5 इंच (Building Tilt) एक तरफ झुक गई।
Building Tilt : पुलिस कार्रवाई और परिवार सुरक्षित बाहर
घटना की सूचना मिलते ही सुशांत लोक थाना पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग की टीम मौके पर पहुँची। एहतियात के तौर पर पास के तीन घरों को तुरंत खाली करवा लिया गया, जिनमें कुल 12 परिवार रहते थे। इन परिवारों को फिलहाल उनके रिश्तेदारों के यहाँ ठहराया गया है। प्रशासन ने इस गंभीर लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए प्लॉट मालिक अंशुल कुमार, ठेकेदार और जेसीबी चालक के खिलाफ सुशांत लोक थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
Building Tilt : विशेषज्ञों की निगरानी और अगला कदम
आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ मोहित शर्मा और इंजीनियरों की टीम लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
क्रेनों का सहारा: इमारत को और अधिक झुकने से रोकने के लिए फिलहाल दो क्रेनें लगाई गई हैं।
ढाई इंच का अल्टीमेटम: विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इमारत का झुकाव ढाई इंच से अधिक बढ़ता है, तो सुरक्षा की दृष्टि से इसे गिराने के आदेश दे दिए जाएंगे।
बचाव का विकल्प: इंजीनियरों का कहना है कि यदि बारिश न हो और समय रहते नींव में सीमेंटेड फिलिंग कर 100 एमएम की सपोर्टिव दीवार बना दी जाए, तो इमारत को बचाया जा सकता है। हालांकि, मौसम में बदलाव या बारिश होने पर नमी के कारण बड़ा हादसा होने का भी खतरा बना हुआ है।
