चिंटल पैराडाइसो मामले में HRERA का फैसला: आवंटन रद्द करने पर बिल्डर को 72.5 लाख चुकाने का आदेश
सोसायटी 10 जनवरी, 2022 को तब सुर्खियों में आई थी जब इसके डी टावर की छठी मंजिल के ड्राइंग रूम का एक हिस्सा ढह गया था, जिसमें दो महिलाओं की मौत हो गई थी।

HRERA : हरियाणा रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण के न्यायनिर्णायक अधिकारी ने सेक्टर-109 स्थित चिंटल पैराडाइसो सोसाइटी से जुड़े एक बड़े मामले में बिल्डर चिंटल इंडिया लिमिटेड के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।
अपने फ्लैट का कब्जा न मिलने और बाद में आवंटन अवैध रूप से रद्द किए जाने से परेशान एक खरीदार को राहत देते हुए, हरेरा ने बिल्डर को करीब 72 लाख 50 हजार रुपये की बड़ी राशि चुकाने का आदेश दिया है।
यह फैसला बिल्डर की मनमानी और परियोजना में देरी के चलते उपभोक्ता को हुए वित्तीय और मानसिक नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करता है।
लखनऊ निवासी याचिकाकर्ता कुमार मंगलम डालमिया ने 2011 में इस विवादित सोसाइटी के ‘एच’ टावर में फ्लैट नंबर 703 खरीदा था। उन्हें अक्टूबर 2015 में फ्लैट का कब्जा मिलना था, जिसके एवज में वह बिल्डर को लगभग एक करोड़ रुपये की राशि पहले ही दे चुके थे। हालांकि, बिल्डर को सोसाइटी का कब्जा प्रमाण पत्र (सीसी) अगस्त 2016 में मिला और जनवरी 2017 में उन्हें कब्जा देने का प्रस्ताव मिला।
विवाद बढ़ने पर, बिल्डर ने जनवरी 2019 में एकतरफा कार्रवाई करते हुए याचिकाकर्ता के फ्लैट का आवंटन रद्द कर दिया।
हरेरा के न्यायनिर्णायक अधिकारी ने अपने आदेश में निम्नलिखित भुगतान का निर्देश दिया है:
- ब्याज सहित वापसी: फ्लैट की लागत पर ब्याज के रूप में लगभग ₹70 लाख।
- मानसिक उत्पीड़न हर्जाना: मानसिक रूप से परेशान करने के लिए ₹2 लाख की राशि।
- कानूनी खर्च: याचिका दायर करने की एवज में ₹50 हजार।
इस तरह याचिकाकर्ता अब बिल्डर से करीब ₹1 करोड़ 70 लाख (मूलधन + ब्याज) वापसी का हकदार है।
सोसायटी 10 जनवरी, 2022 को तब सुर्खियों में आई थी जब इसके ‘डी’ टावर की छठी मंजिल के ड्राइंग रूम का एक हिस्सा ढह गया था, जिसमें दो महिलाओं की मौत हो गई थी। इस दुर्घटना के बाद, जिला प्रशासन ने आईआईटी दिल्ली और सीआरआरआई (केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान) की रिपोर्ट के आधार पर चिंटल पैराडाइसो के सभी नौ टावरों को रहने के लिहाज से असुरक्षित घोषित कर दिया था।
न्यायालय में विचाराधीन मामलों के बीच, सोसाइटी के ई, एफ, जी और एच टावर को पहले ही ध्वस्त किया जा चुका है, जबकि ‘डी’ टावर को तोड़ने का काम जारी है। टावर ए, बी और सी का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, जिनमें अभी भी निवासी रह रहे हैं। हरेरा का यह आदेश न केवल इस मामले के पीड़ित को न्याय दिलाता है, बल्कि चिंटल पैराडाइसो के अन्य प्रभावित फ्लैट खरीदारों के लिए भी एक नजीर पेश करता है।