मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी (जिनके पास वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव का भी दायित्व है) ने इस संबंध में एक आधिकारिक पत्र जारी कर दिया है।
यह सुविधा स्थायी और अस्थायी, दोनों प्रकार के नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को मिलेगी। हालांकि, इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण शर्तें निर्धारित की गई हैं:
- सेवा की शर्त: कर्मचारियों को अगले दस माह तक सेवा में बने रहने की संभावना होनी चाहिए।
- अस्थायी कर्मचारी: अस्थायी कर्मचारियों के लिए यह अग्रिम राशि केवल एक स्थायी कर्मचारी की जमानत पर ही स्वीकृत की जाएगी।
- वितरण की समय सीमा: स्वीकृत राशि को 17 अक्टूबर, 2025 तक आहरित (Draw) और वितरित (Disburse) करना आवश्यक है।
- वसूली प्रक्रिया: अग्रिम की वसूली दस समान मासिक किस्तों में की जाएगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा सभी कर्मचारियों को उपलब्ध नहीं होगी। निम्नलिखित श्रेणियों के कर्मचारियों को यह फेस्टिवल एडवांस नहीं दिया जाएगा:
- वर्क-चार्ज स्टाफ, आकस्मिक वेतन भोगी, दैनिक वेतन भोगी और अनुबंधित (Contractual) कर्मचारी।
- निलंबित कर्मचारी या वे, जिनके विरुद्ध हरियाणा सिविल सेवा (शिकायत एवं अपील) नियम, 2016 के नियम-7 के तहत कोई कार्यवाही लंबित है।
- अन्य विभाग, निगम या स्थानीय निकाय में प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर कार्यरत कर्मचारी।
- यदि पति और पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं, तो एडवांस केवल एक को ही दिया जाएगा।
वित्त विभाग ने अग्रिम राशि के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। यदि कोई कर्मचारी अग्रिम का दुरुपयोग करता है, तो उससे 10 प्रतिशत की दर से दंडात्मक ब्याज वसूला जाएगा। इसके अतिरिक्त, यदि किसी अयोग्य कर्मचारी को राशि स्वीकृत की जाती है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) की होगी, जिसके विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
सभी विभागाध्यक्षों को अग्रिम व्यय की विस्तृत जानकारी नवंबर 2025 के अंत तक वित्त विभाग (वेज़ एंड मीन्स ब्रांच) को निर्धारित प्रपत्र में भेजना अनिवार्य है, ताकि महालेखाकार कार्यालय से इसका मिलान किया जा सके।
यह निर्णय त्योहारी सीज़न में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी वित्तीय सहायता प्रदान करेगा।