Gurugram News: प्रदूषण से निपटने की तैयारी, नगर निगम ने सलाहकार कंपनियों को किया नियुक्त
अक्तूबर के बाद आमतौर पर गुरुग्राम की हवा की गुणवत्ता खराब होने लगती है। इसी को ध्यान में रखते हुए, नगर निगम ने इस बार एक नई रणनीति अपनाई है। पहले सिर्फ शिकायतों के आधार पर कार्रवाई होती थी

Gurugram News: सर्दियों से पहले वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने के लिए गुरुग्राम नगर निगम ने कमर कस ली है। शहर की हवा को बेहतर बनाने के लिए निगम ने चार जोन में सलाहकार कंपनियों को नियुक्त करने का फैसला किया है। इन कंपनियों का मुख्य काम शहर में प्रदूषण फैलाने वाले कारकों का पता लगाना और उनकी रोजाना की रिपोर्ट सीधे निगम को सौंपना होगा। ताकि समय रहते इन समस्याओं का समाधान किया जा सके। इस पहल पर करीब 12 लाख रुपये खर्च होने की उम्मीद है।
अक्तूबर के बाद आमतौर पर गुरुग्राम की हवा की गुणवत्ता खराब होने लगती है। इसी को ध्यान में रखते हुए, नगर निगम ने इस बार एक नई रणनीति अपनाई है। पहले सिर्फ शिकायतों के आधार पर कार्रवाई होती थी, लेकिन अब सलाहकार कंपनियां हर क्षेत्र का सर्वे करके प्रदूषण के स्रोतों (जैसे धूल, निर्माण कार्य, या कूड़ा जलाना) की सटीक जानकारी देंगी।
इससे निगम तुरंत कार्रवाई करके समस्या को खत्म कर पाएगा। नगर निगम आयुक्त कहा कि हमारी कोशिश है कि शहर की हवा की गुणवत्ता प्रभावित न हो। सलाहकार एजेंसियों की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर हम त्वरित कार्रवाई कर पाएंगे।
हरियाणा प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की गुरुग्राम में लगी चार में से तीन मशीनें पिछले 11 महीनों से बंद पड़ी हैं। ये मशीनें टेरी, विकास सदन और गुरुग्राम विश्वविद्यालय परिसर में लगी हुई थीं। इन मशीनों के रखरखाव का टेंडर अक्टूबर 2024 में खत्म हो गया था और मुख्यालय की ओर से अभी तक नया टेंडर जारी नहीं किया गया है।

प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि जल्द ही मुख्यालय की ओर से नया टेंडर जारी किया जाएगा, जिसके बाद इन मशीनों का संचालन फिर से शुरू हो पाएगा। फिलहाल, केवल एक मशीन आईएमडी द्वारा संचालित की जा रही है, जो सीमित क्षेत्र के वायु प्रदूषण का ही आकलन कर पाती है। इस स्थिति ने नगर निगम की नई पहल के महत्व को और बढ़ा दिया है।
हर साल दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण इस कदर बढ़ जाता है कि पूरा क्षेत्र एक गैस चेंबर जैसा लगने लगता है। इसके लिए अक्सर नगर निकायों पर लापरवाही का आरोप लगता रहा है। इस बार नगर निगम ने पहले ही तैयारी करके यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि प्रदूषण के कारण ग्रैप (Graded Response Action Plan) जैसी सख्त पाबंदियां न लगानी पड़ें और शहर के लोगों को स्वच्छ हवा मिल सके।











