Murder Mystery वजीरपुर के उस बंद कमरे का खूनी सच, 20 घंटे तक लाशों के पास बैठा रहा ‘कसाई बाप’
जिस पिता की बाहों में बच्चे महफूज थे, उसी ने उन्हें मौत की नींद सुलाया; कमरे में सड़ती रहीं लाशें और बगल में बेखौफ बैठा रहा नाजिम

Murder Mystery : कहते हैं पिता बच्चों के लिए ढाल होता है और पति अपनी पत्नी का रक्षक, लेकिन गुरुग्राम के वजीरपुर गांव में एक ‘इंसानी दरिंदे’ ने इन तमाम पवित्र रिश्तों का कत्ल कर दिया। जिस प्यार के लिए कभी सात जन्मों के वादे किए गए थे, उसी प्यार का अंत पांच बेगुनाह जिंदगियों की लाशों के साथ हुआ। यह कहानी केवल एक अपराध की नहीं, बल्कि उस सनक की है जिसने 20 घंटों तक पांच शवों के साथ एक ही कमरे में वक्त गुजारा।
लाशों के बीच बीता ‘खूनी’ सन्नाटा
शनिवार देर रात जब गुरुग्राम पुलिस वजीरपुर के उस बंद कमरे का दरवाजा तोड़कर भीतर दाखिल हुई, तो मंजर ऐसा था कि मजबूत कलेजे वाले पुलिसकर्मियों की भी रूह कांप गई। कमरे में फर्श से लेकर बिस्तरों तक खून ही खून था। 35 वर्षीय नजमा और उसके चार मासूम बच्चों इकरा (14), सिफा (12), खतिना (10) और आयन (8) के बेजान शरीर पड़े थे।
हैरानी और घृणा की पराकाष्ठा यह थी कि हत्या का आरोपी मोहम्मद नाजिम कहीं भागा नहीं, बल्कि उन पांच लाशों के बीच पूरे 20 घंटे तक बैठा रहा। शुक्रवार की आधी रात को जब उसने इस वीभत्स हत्याकांड को अंजाम दिया, उसके बाद से वह कमरे की कुंडी लगाकर उन्हीं मासूमों के पास बैठा रहा जिन्हें कभी उसने गोद में खिलाया था।
झगड़ा, जुनून और फिर कत्लेआम
पुलिस जांच में सामने आया है कि शुक्रवार की रात नाजिम का अपनी पत्नी नजमा के साथ किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। यह विवाद इतना बढ़ा कि नाजिम के अंदर का इंसान मर गया। उसने एक-एक कर अपनी पत्नी और फिर उन चार बच्चों को मौत के घाट उतार दिया जिन्होंने शायद मरते वक्त अपने पिता की ओर रहम की नजरों से देखा होगा। मौके पर मिला एक टूटा हुआ मोबाइल फोन उस खूनी संघर्ष की गवाही दे रहा था, जो उस रात चीखों के बीच खत्म हो गया।
प्रेम विवाह से कब्रगाह तक का सफर
नाजिम और दिल्ली की रहने वाली नजमा ने प्रेम विवाह किया था। अपनों के खिलाफ जाकर बसाया गया वह घर आज खुद एक कब्रगाह बन चुका है। जिन बच्चों के कंधों पर भविष्य की जिम्मेदारी होनी थी, उन्हें उनके पिता ने ही मौत की नींद सुला दिया। 8 साल का आयन, जो शायद अभी ठीक से दुनिया को समझना शुरू ही कर रहा था, अपने पिता के गुस्से की भेंट चढ़ गया।
बिना किसी पछतावे के बैठा है कातिल
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात आरोपी का व्यवहार है। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी नाजिम के चेहरे पर शिकन तक नहीं है। जहां सामान्य इंसान एक लाश देखकर सहम जाता है, वहां नाजिम 20 घंटे तक पांच अपनों की लाशों के पास बिना किसी पछतावे के बैठा रहा। उसकी आंखों में न तो अपनी पत्नी को खोने का गम है और न ही उन चार मासूमों की जान लेने का अफसोस। वह बिल्कुल शांत और सहज भाव से बैठा है, जैसे उसने कोई अपराध किया ही न हो।
समाज और सिस्टम के सामने सुलगते सवाल
यह घटना न केवल गुरुग्राम बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है। आखिर एक इंसान इतना पत्थर दिल कैसे हो सकता है कि उसे अपनी ही औलाद का गला रेतते वक्त हाथ न कांपे? पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और साक्ष्य जुटा रही है, लेकिन वजीरपुर की गलियों में पसरा वह सन्नाटा आज भी उन मासूमों की चीखों को दोहरा रहा है।