Fraud : 1970 में मरे बुजुर्ग को कागजों में जिंदा कर हड़पी जमीन, कोर्ट ने दिए FIR के आदेश, पटौदी में FIR दर्ज
पटौदी में 1970 में गुजर चुके बुजुर्ग की फर्जी रजिस्ट्री का मामला आया सामने, पुलिस को 24 घंटे में FIR दर्ज करने के आदेश

Fraud/गुरुग्राम
गुरुग्राम के पटौदी इलाके से धोखाधड़ी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां भू-माफियाओं ने 54 साल पहले दुनिया छोड़ चुके एक बुजुर्ग को कागजों में जिंदा दिखाकर उनकी करोड़ों की पुश्तैनी जमीन किसी और के नाम कर दी। मामला अदालत पहुंचने के बाद ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC) दीपक जागलान की कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है और पटौदी थाना पुलिस को 24 घंटे के अंदर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का हुक्म दिया है।
Fraud : क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता भूपेंद्र शर्मा, राज कुमार शर्मा और आरती मेहता ने अदालत में याचिका दाखिल कर बताया कि उनके पूर्वज बोधराज को 1957 में पुनर्वास योजना के तहत 4 कनाल 14 मरला जमीन मिली थी। यह जमीन उनके दादा चमनलाल के नाम पर नामांकित (इंतकाल) हुई थी। चमनलाल का देहांत 15 दिसंबर 1970 को ही हो चुका था, जिसके आधिकारिक दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड भी मौजूद हैं।
आरोप है कि जनवरी 2025 में जालसाजों ने चमनलाल नाम का एक नकली व्यक्ति खड़ा किया। दिल्ली के नरेला के पते का इस्तेमाल कर इस बहरूपिये के नाम पर फर्जी पहचान पत्र तैयार करवाए गए।
Fraud : फर्जी दस्तावेज बनाकर बेची गई जमीन जालसाजी की साजिश यहीं नहीं रुकी:
22 जनवरी 2025: फर्जी चमनलाल को रजिस्ट्री ऑफिस में पेश कर जमीन की बिक्री विलेख (वसीका नंबर 3930) ‘परवीन’ नामक महिला के नाम करा दी गई।
25 फरवरी 2025: महज एक महीने के भीतर परवीन ने इस जमीन को ट्रांसफर डीड (वसीका नंबर 4444) के जरिए अपने पति नूर हसन को हस्तांतरित कर दिया।
गवाह की भूमिका: शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इन दोनों दस्तावेजों में गांव के नंबरदार मामन सिंह ने गवाह के तौर पर दस्तखत किए हैं, जिससे उनकी भूमिका भी संदेहास्पद है।
Fraud : अदालत की नाराजगी और पुलिस को निर्देश शुरुआत में पुलिस द्वारा सिर्फ मामूली कार्रवाई (कलंदरा) किए जाने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। बीएनएसएस (BNSS) की धारा 175(3) के तहत सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी मृत व्यक्ति की जगह फर्जी इंसान खड़ा करके जमीन हड़पना गंभीर अपराध है और इसे सिर्फ दीवानी (सिविल) विवाद बताकर टाला नहीं जा सकता।
कोर्ट ने पटौदी थाना प्रभारी को आदेश दिया है कि:
आदेश की कॉपी मिलते ही 24 घंटे में प्रासंगिक बीएनएस धाराओं के तहत केस दर्ज किया जाए।
फर्जी पहचान पत्र बनाने वाले गिरोह, फर्जी चमनलाल और रजिस्ट्री प्रक्रिया में शामिल सभी लोगों की गहन जांच हो।
मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर तय की गई है, जिसमें पुलिस को अपनी अनुपालन रिपोर्ट सौंपनी होगी।
