Encroachment On Water Bodies : 181 में से 65 तालाबों पर अवैध कब्ज़ा, मंदिर से लेकर शराब ठेके तक बने, निगम का बड़ा खुलासा
निगम की बागवानी विंग द्वारा तैयार की गई इस 'जीओ-टैगिंग सर्वे रिपोर्ट' के अनुसार, इन 65 तालाबों की ज़मीनों पर विभिन्न प्रकार के निर्माण किए गए हैं

Enchrochment On water Bodies : मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में हर मॉनसून में होने वाले गंभीर जलभराव के पीछे की सबसे बड़ी वजह अब आधिकारिक तौर पर सामने आ गई है। नगर निगम (एमसीजी) द्वारा करवाए गए एक विस्तृत सर्वे ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि शहर के 181 प्राकृतिक तालाबों में से 65 की ज़मीन पर अवैध कब्जा या निर्माण हो चुका है।
इन जल संचयन और निकासी के स्रोतों के नष्ट होने से बारिश का पानी प्राकृतिक रूप से बहने के बजाय सड़कों पर जमा हो जाता है, जिससे शहरवासी हर साल भारी परेशानी झेलते हैं।
निगम की बागवानी विंग द्वारा तैयार की गई इस ‘जीओ-टैगिंग सर्वे रिपोर्ट’ के अनुसार, इन 65 तालाबों की ज़मीनों पर विभिन्न प्रकार के निर्माण किए गए हैं, जो अतिक्रमण की गंभीरता को दर्शाते हैं: कई तालाबों पर शनिदेव मंदिर, खाटू श्याम बाबा मंदिर, शमशान घाट, सामुदायिक केंद्र और स्कूल तक बना दिए गए हैं।
सिकंदरपुर घोषी गांव में एक तालाब की ज़मीन पर बूस्टिंग स्टेशन और एक शराब की दुकान तक खड़ी कर दी गई है।
चौंकाने वाली बात यह है कि चक्करपुर में एक तालाब की ज़मीन पर स्थानीय पार्षद का कार्यालय बना मिला है। इसके अलावा, बादशाहपुर और सराय अलावर्दी जैसे इलाकों में हरिजनों के लिए अवैध प्लॉटिंग और कॉलोनियों का निर्माण हुआ है।
रामलीला मंच, गऊशालाएं, पार्क और वाटर सप्लाई यूनिट जैसी संरचनाओं ने भी तालाबों की जल-धारण क्षमता को खत्म कर दिया है।
सर्वे रिपोर्ट बताती है कि शहर के कुल 181 तालाबों में से अब सिर्फ 33 तालाबों में ही मुश्किल से पानी बचा है। इन प्राकृतिक जल निकासी स्रोतों के सिकुड़ने या समतल किए जाने के कारण इनकी जल धारण क्षमता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
निगम के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि शहर में मानसून के दौरान 153 जगहों पर जलभराव होता है। इन जलभराव स्थलों के आसपास के गांवों में तालाबों पर हुए अवैध कब्जों ने जल निकासी की पूरी व्यवस्था को चौपट कर दिया है।
अवैध कब्जों के कारण न केवल नागरिकों को जलभराव झेलना पड़ रहा है, बल्कि करोड़ों रुपये की सरकारी ज़मीन पर कब्जा होने से निगम को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।
इस विस्तृत सर्वे रिपोर्ट को अब निगम मुख्यालय भेजा जा रहा है। अतिरिक्त निगम आयुक्त के निर्देश पर तैयार हुई इस रिपोर्ट के बाद, शहरवासियों को उम्मीद है कि निगम इन अवैध निर्माणों को हटाने और शहर को डूबने से बचाने के लिए आगामी मॉनसून से पहले कोई बड़ी और स्थायी कांर्रवाई करेगा।