Gurugram-Faridabad में ED की बड़ी रेड: Richa Industries पर बैंक Fraud का भंडाफोड़, नकदी-कारें-बैंक खाते जब्त

ईडी ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की थी। जांच में पाया गया कि आरोपी व्यक्तियों ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक कदाचार के माध्यम से वर्ष 2015 से 2018 के दौरान बैंकों को ₹236 करोड़ का substantial नुकसान पहुँचाया।

Gurugram-Faridabad : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुग्राम और फरीदाबाद में बड़ी कार्रवाई करते हुए मेसर्स रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और उसके प्रमोटरों के आठ ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई, जिसका निशाना RIL के प्रमोटर— संदीप गुप्ता, मनीष गुप्ता और सुशील गुप्ता थे।

ईडी ने इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़, ₹8 लाख नकद और चार महंगी कारें जब्त की हैं, साथ ही ₹40 लाख से अधिक के बैंक बैलेंस को भी फ्रीज कर दिया है।

ईडी ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की थी। जांच में पाया गया कि आरोपी व्यक्तियों ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक कदाचार के माध्यम से वर्ष 2015 से 2018 के दौरान बैंकों को ₹236 करोड़ का substantial नुकसान पहुँचाया।

ईडी की जांच में यह खुलासा हुआ कि प्रमोटरों— संदीप गुप्ता और मनीष गुप्ता— तथा परिवार के अन्य सदस्यों ने RIL की संपत्ति हड़पने और कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (CIRP) को विफल करने के लिए एक गहरी साजिश रची थी।

जांच के अनुसार, प्रमोटरों ने कथित तौर पर मेसर्स सारीगा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड (SCPL) नामक एक शेल कंपनी (मुखौटा कंपनी) का गठन किया। इसमें RIL के एक पूर्व कर्मचारी को ‘बेनामीदार’ के रूप में इस्तेमाल किया गया। इस समन्वित प्रयास से, SCPL ने धोखाधड़ी से लेनदारों की समिति (CoC) में वोटिंग अधिकार हासिल कर लिए।

ईडी का आरोप है कि इस रणनीति के चलते गुप्ता परिवार CIRP प्रक्रिया को अपने पक्ष में बाधित और प्रभावित करने में सफल रहा। दिवालियापन की अवधि के दौरान, प्रमोटरों ने कथित तौर पर कंपनी के संचालन पर अनधिकृत नियंत्रण बनाए रखा और वैधानिक मानदंडों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए अनुचित लाभ प्राप्त किए।

जांच में रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (समाधान पेशेवर) अरविंद कुमार की संदिग्ध भूमिका भी सामने आई है। उन पर प्रमोटर्स के साथ मिलीभगत करने का आरोप है। आरोप है कि लेनदेन ऑडिट रिपोर्ट में कई धोखाधड़ी वाले सौदों का खुलासा होने के बावजूद, उन्होंने जानबूझकर बचने के लिए आवेदन (Application) दाखिल नहीं किए।

ईडी को ऐसे सबूत भी मिले हैं जो संकेत देते हैं कि अपराध से अर्जित धन के माध्यम से एक प्रॉक्सी संस्था ने RIL को फिर से खरीदने के लिए एक रिजॉल्यूशन प्लान जमा किया था, जो कंपनी पर नियंत्रण वापस पाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था।

इसके अलावा, प्रमोटरों संदीप गुप्ता, मनीष गुप्ता और श्वेता गुप्ता पर बैंक देनदारियों से बचने के लिए व्यक्तिगत दिवालियापन कार्यवाही के दौरान झूठे हलफनामे दाखिल करने का भी आरोप है, जिसमें उन्होंने आवश्यक संपत्ति की जानकारी छिपाई थी।

तलाशी के दौरान, ईडी ने कई डिजिटल डिवाइस, फर्जी दस्तावेज़, गुप्ता परिवार की शेल कंपनियों से संबंधित टैली डेटा, कानूनी रिकॉर्ड और कंपनी से फंड के डायवर्जन से जुड़े सबूत बरामद किए और उन्हें जब्त कर लिया। इसके अलावा, प्रमोटरों और उनसे जुड़े लोगों के बैंक खाते, जिनमें ₹40 लाख से अधिक की राशि थी, उन्हें फ्रीज कर दिया गया है।

Sunil Yadav

सुनील यादव पिछले लगभग 15 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों में ( India Tv, Times Now,… More »
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