ED Action : रिचा इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर संदीप गुप्ता गिरफ्तार, 8 दिन की ED रिमांड

ED की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कंपनी ने सूती कपड़े (7.42 करोड़) और सोलर से संबंधित ( 8.50 करोड़) फर्जी बिक्री दिखाई। असल में कोई माल सप्लाई नहीं किया गया था। ऐसी कंपनियों से 9.23 करोड़ की मशीनरी की खरीद दिखाई गई जो अस्तित्व में ही नहीं थीं।

ED Action :  प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने मेसर्स रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के पूर्व प्रमोटर और निलंबित प्रबंध निदेशक संदीप गुप्ता को मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA, 2002) के तहत गिरफ्तार किया है। आरोपी को गुरुग्राम की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहा से उसे 8 दिनों की ED हिरासत में भेज दिया गया है।

CBI द्वारा दर्ज FIR के आधार पर ED ने जांच शुरू की थी। आरोप है कि संदीप गुप्ता और उनके सहयोगियों ने आपराधिक साजिश रचकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) को 236 करोड़ रुपये का चूना लगाया। यह धोखाधड़ी मुख्य रूप से साल 2015 से 2018 के बीच की गई थी।

ED की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।  कंपनी ने सूती कपड़े (7.42 करोड़) और सोलर से संबंधित ( 8.50 करोड़) फर्जी बिक्री दिखाई। असल में कोई माल सप्लाई नहीं किया गया था। ऐसी कंपनियों से 9.23 करोड़ की मशीनरी की खरीद दिखाई गई जो अस्तित्व में ही नहीं थीं।

लगभग 16.40 करोड़ की राशि को संबंधित कंपनियों (Related Parties) में ट्रांसफर कर दिया गया। कंपनी के फंड का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए ‘रोहतक प्रोजेक्ट’ को हथियाने में किया गया।

जब कंपनी दिवाला प्रक्रिया से गुजर रही थी, तब भी संदीप गुप्ता ने धोखाधड़ी जारी रखी। जांच में पाया गया कि दिवाला प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले संदीप गुप्ता ने 232 करोड़ की कॉर्पोरेट गारंटी जारी की। इसका मकसद लेनदारों की समिति  में अपना प्रभाव बनाए रखना था ताकि बैंकों के फैसलों को रोका जा सके।

संदीप गुप्ता ने अपनी कंपनी के पूर्व कर्मचारी के नाम पर एक ‘शेल कंपनी’ बनाई ताकि वे परदे के पीछे से कंपनी का नियंत्रण अपने हाथ में रख सकें। CIRP के दौरान भी एक बड़े मसूरी प्रोजेक्ट को प्रमोटर की कंपनी को सब-कॉन्ट्रैक्ट देकर लगभग 40 करोड़ की संपत्ति का नुकसान पहुँचाया गया।

हाल ही में हुई नीलामी में रिचा इंडस्ट्रीज को कावेरी इंडस्ट्रीज और नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव के कंसोर्टियम ने खरीदा। बैंकों (IOB और यूनियन बैंक) ने 696 करोड़ का दावा पेश किया था, लेकिन उन्हें केवल 40.29 करोड़ ही मिले। इसका मतलब है कि बैंकों को अपने कर्ज पर 94% का घाटा   सहना पड़ा।

“संदीप गुप्ता ने न केवल बैंक से धोखाधड़ी की, बल्कि कानूनी दिवाला प्रक्रिया को भी बाधित करने की कोशिश की ताकि करोड़ों की संपत्ति को ठिकाने लगाया जा सके।”  ED जांच रिपोर्ट

Manu Mehta

मनु मेहता पिछले लगभग 18 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों (ANI News, News Express, TV 9,… More »
Back to top button

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker!