LPG Cylinder Shortage : गुरुग्राम में गैस सिलेंडर की बुकिंग पर झगड़ा, चार बच्चों के पिता ने लगाया फंदा

ममता और चूल्हे की लड़ाई में उजड़ा सुहाग; गढ़ी हरसरू में खाली सिलेंडर ने ली पेंटर की जान, व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल

LPG Cylinder Shortage :  कहते हैं गरीबी की मार इंसान को तोड़ देती है, लेकिन जब बुनियादी जरूरतों के लिए भी जद्दोजहद जानलेवा बन जाए, तो वह त्रासदी बन जाती है। गुरुग्राम के गढ़ी हरसरू इलाके में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहाँ रसोई की मामूली सी दिखने वाली ‘गैस बुकिंग’ एक परिवार की खुशियों को निगल गई। सिलेंडर की किल्लत और उसे बुक कराने को लेकर उपजे तनाव ने 33 वर्षीय राहुल को मौत के गले लगाने पर मजबूर कर दिया। गुरुग्राम के गढ़ी हरसरू में एलपीजी सिलेंडर बुकिंग को लेकर पति-पत्नी के बीच हुए झगड़े ने भयावह रूप ले लिया। विवाद इतना बढ़ा कि 33 वर्षीय राहुल ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ रहता था।

सिलेंडर के लिए ‘कतार’ और घर में ‘तकरार’ पिछले कुछ समय से एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग और आपूर्ति को लेकर लोग खासे परेशान हैं। सुबह से शाम तक गैस की लाइनों में खड़े रहने की मजबूरी अब घरों के भीतर कलह का कारण बन रही है। रविवार रात गढ़ी हरसरू में रहने वाले राहुल का अपनी पत्नी से इसी बात को लेकर विवाद हुआ। विवाद की जड़ थी—खाली सिलेंडर और उसे बुक कराने की जद्दोजहद। यह झगड़ा इतना बढ़ा कि आवेश में आकर राहुल ने खौफनाक कदम उठा लिया।

रात भर इंतज़ार, सुबह मिला सन्नाटा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के संभल निवासी राहुल पेशे से पेंटर थे और अपने चार मासूम बच्चों व पत्नी के साथ यहाँ रहते थे। रविवार रात पत्नी से हुए झगड़े के बाद राहुल कमरे से बाहर निकल गए। पत्नी को लगा कि शायद गुस्सा शांत होने पर वह लौट आएंगे, लेकिन सोमवार सुबह जब उसकी आँख खुली, तो सामने का मंजर रूह कंपा देने वाला था। राहुल का शव पास के कमरे के दरवाजे की ग्रिल से फंदे पर लटका मिला।

चार मासूमों के सिर से उठा साया राहुल की मौत के बाद घर में कोहराम मचा है। चार छोटे बच्चे, जिन्हें शायद यह भी नहीं पता कि उनके पिता अब कभी नहीं लौटेंगे, अपनी माँ की चीखें देखकर सहमे हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गैस की किल्लत ने आम आदमी का मानसिक सुकून छीन लिया है। सेक्टर-10ए थाना पुलिस और सेक्टर-93 चौकी प्रभारी मामले की तफ्तीश कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला सिलेंडर की बुकिंग को लेकर हुए विवाद के बाद आत्महत्या का लग रहा है।

निष्कर्ष: व्यवस्था की चूक या गरीबी का बोझ? यह घटना केवल एक आत्महत्या नहीं है, बल्कि उस लाचारी की तस्वीर है जहाँ एक सिलेंडर की बुकिंग जिंदगी से बड़ी हो गई। जहाँ एक ओर शहर हाईटेक हो रहा है, वहीं दूसरी ओर एक पेंटर का परिवार सिर्फ इसलिए बिखर गया क्योंकि घर का चूल्हा जलने की अनिश्चितता ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया था।


Manu Mehta

मनु मेहता पिछले लगभग 18 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों (ANI News, News Express, TV 9,… More »
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