Digital Arrest गैंग का पर्दाफाश: कंबोडिया से लौटा आरोपी दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी चिराग कांजी भाई ने बताया कि वह धोखाधड़ी गिरोह की कॉलिंग टीम का सदस्य था। उन्होंने मिलकर सबसे पहले पीड़ित को फर्जी टेलीकॉम अधिकारी बनकर संपर्क किया

Digital Arrest : गुरुग्राम साइबर अपराध पुलिस ने “डिजिटल अरेस्ट” (Digital Arrest) और “टेलीकॉम अधिकारी बनकर ठगी” करने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी गिरोह के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने इस गिरोह के एक प्रमुख सदस्य को कंबोडिया से दिल्ली लौटने पर इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया है। यह गिरोह चाइना मूल के व्यक्तियों के साथ मिलकर विदेशों से ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा था।
यह मामला तब सामने आया जब 04 दिसंबर 2024 को गुरुग्राम के साइबर अपराध पूर्व थाने में एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने बताया कि उनके बेटे के पास व्हाट्सएप ऑडियो कॉल आया, जिसमें बताया गया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल हवाला के काम में हुआ है। जब बेटे ने इस बात से इनकार किया, तो फर्जी पुलिस अधिकारियों ने FIR दर्ज कराने की धमकी दी।

इसके बाद, जालसाजों ने वीडियो कॉल पर एक नकली सीबीआई अधिकारी से बात कराई, जिसने उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” करने की बात कही और हवाला केस में शामिल होने का डर दिखाकर उनसे अलग-अलग बैंक खातों में कुल 02 करोड़ 92 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए।
साईबर अपराध सहायक पुलिस आयुक्त प्रियांशु दीवान के नेतृत्व में, साइबर अपराध पूर्व थाना पुलिस टीम ने इस मामले में तत्परता से कार्रवाई की।

पुलिस टीम ने इस धोखाधड़ी को अंजाम देने में शामिल एक आरोपी, चिराग कांजी भाई (उम्र-28 वर्ष), निवासी सूरत (गुजरात) की पहचान की और अगस्त 2025 में उसके खिलाफ एलओसी (Lookout Circular) जारी करवा दी थी।
जैसे ही आरोपी चिराग कांजी भाई 07 दिसंबर 2025 को कंबोडिया से दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरा, उसे गुरुग्राम पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया।
आरोपी की शिक्षा 10वीं तक हुई है और वह 2021 से दुबई में वर्क वीजा पर गया था। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि अगस्त 2025 से वह कंबोडिया चला गया था और वहाँ चाइना मूल के लोगों के साथ मिलकर साइबर ठगी का काम करने लगा।
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी चिराग कांजी भाई ने बताया कि वह धोखाधड़ी गिरोह की कॉलिंग टीम का सदस्य था। उन्होंने मिलकर सबसे पहले पीड़ित को फर्जी टेलीकॉम अधिकारी बनकर संपर्क किया और फिर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर धोखाधड़ी की वारदात को अंजाम दिया।
धोखाधड़ी से मिली राशि को ट्रांसफर करने का तरीका भी जटिल था:
आरोपी को उसके काम के बदले कंबोडियन मुद्रा में कमीशन मिलता था।
वह साइबर ठगी से प्राप्त इस कमीशन राशि को बिटकॉइन वैलेट (Bitcoin Wallet) के माध्यम से अपने अन्य साथियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर लेता था।
इस अभियोग में गुरुग्राम पुलिस द्वारा अब तक मुख्य आरोपी चिराग कांजी भाई और एक अन्य आरोपी अशीषभाई रमनलाल सहित कुल 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
गिरफ्तार आरोपी चिराग कांजी भाई को न्यायालय में पेश करके 02 दिन के पुलिस हिरासत रिमांड पर लिया गया था। पुलिस रिमांड के बाद को उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अभियोग का विस्तृत अनुसन्धान अभी भी जारी है।












