Rajasthan में बनाया ठगी का कंट्रोल रूम : दुबई से जुड़े ठगी के तार, फ्लैट से ऑपरेट हो रहा था अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट, 9 गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य संचालक अनिल बैरागी और संस्कार उर्फ प्रांशु हैं। पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यह गिरोह सीधे दुबई में बैठे मास्टरमाइंड्स के संपर्क में था।

Rajasthan : साइबर ठगों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में गुरुग्राम पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है। साइबर अपराध पश्चिम की टीम ने राजस्थान के कोटा में एक फ्लैट पर छापेमारी कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय 9 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से स्टॉक ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का झांसा देकर और ऑनलाइन कसीनो के नाम पर लोगों से ठगी कर रहा था।
एसीपी साइबर अपराध प्रियान्शु दिवान के नेतृत्व और निरीक्षक संदीप कुमार की देखरेख में पुलिस टीम ने 14 जनवरी 2026 को कोटा, राजस्थान में दबिश दी। वहां एक किराए के फ्लैट से यह पूरा गिरोह संचालित हो रहा था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 13 मोबाइल फोन, 03 लैपटॉप, 01 टैबलेट और 37 एटीएम कार्ड बरामद किए हैं।

गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य संचालक अनिल बैरागी और संस्कार उर्फ प्रांशु हैं। पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यह गिरोह सीधे दुबई में बैठे मास्टरमाइंड्स के संपर्क में था। दुबई से इन्हें व्हाट्सएप ग्रुप और ऑनलाइन गेमिंग के लिंक भेजे जाते थे। ठगी गई कुल राशि का 70% हिस्सा दुबई भेजा जाता था, जबकि 30% कमीशन ये आरोपी आपस में बांटते थे।
जांच में सामने आया कि ठगी की रकम ‘माधव एसोसिएटेड’ नाम की कंपनी के खाते में मंगवाई गई थी। खाताधारक लेखराज ने अपना बैंक अकाउंट महज 10 हजार रुपये में बेचा था। आरोपियों ने फर्जी रेंट एग्रीमेंट के आधार पर कई बैंकों में खाते खुलवा रखे थे ताकि पुलिस की नजरों से बच सकें।

मुख्य आरोपी अनिल बैरागी ने कोटा में 15 हजार रुपये प्रति माह की सैलरी पर गगन पटेल, हिमांशु, दीपक जैसे लड़कों को काम पर रखा था। इनका काम लोगों को कॉल करना, उन्हें इन्वेस्टमेंट के लिए चैट के जरिए बहलाना और बैंक में पैसे ट्रांसफर करवाना था। ज्यादा ठगी करने वालों को सैलरी के अलावा अलग से कमीशन भी दिया जाता था।
पुलिस ने सभी 9 आरोपियों (लेखराज, मनीष, अनिल, सोनू, दीपक, हिमांशु, संस्कार, गगन और मनीष मीणा) को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इन खातों के जरिए हुए अन्य ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है।










