Consumer Forum : कैरी बैग के 18 रुपये लेना कंपनी कंपनी पड़ा भारी, उपभोक्ता फोरम ने कंपनी पर लगाया 26 हजार का हर्जाना

उपभोक्ता आयोग के इस कदम को पूरे देश के खुदरा विक्रेताओं के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि ग्राहक से सामान खरीदने के बाद उसे घर ले जाने के लिए आवश्यक कैरी बैग की कीमत वसूलना, ग्राहक को सेवा या उत्पाद चुनने की स्वतंत्रता से वंचित करना है।

Consumer Forum : जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कैरी बैग के लिए शुल्क वसूलने को ‘अनुचित व्यापार प्रथा’ मानते हुए एक कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने दो अलग-अलग खुदरा कंपनियों पर ग्राहकों से कैरी बैग का मामूली शुल्क लेने के लिए भारी जुर्माना लगाया है। इन दोनों फैसलों में, कंपनियों को मानसिक परेशानी, कानूनी खर्च और कैरी बैग की कीमत मिलाकर ₹52,000 से अधिक का भुगतान करने का आदेश दिया गया है।

उपभोक्ता आयोग के इस कदम को पूरे देश के खुदरा विक्रेताओं के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि ग्राहक से सामान खरीदने के बाद उसे घर ले जाने के लिए आवश्यक कैरी बैग की कीमत वसूलना, ग्राहक को सेवा या उत्पाद चुनने की स्वतंत्रता से वंचित करना है।

एक मामले में, एक ग्राहक ने स्टोर से ₹1647 का सामान खरीदा था, जिसके लिए उनसे कैरी बैग के तौर पर ₹18 वसूले गए। इस शिकायत पर सुनवाई करते हुए, आयोग ने पाया कि कंपनी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कोई बचाव पेश नहीं किया। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया कि वह न केवल ₹18 की राशि 9 प्रतिशत ब्याज के साथ शिकायतकर्ता को वापस करे, बल्कि मानसिक परेशानी के लिए ₹15,000 का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया के खर्च के तौर पर ₹11,000 अतिरिक्त दे।

इसी तरह के दूसरे मामले में, एक स्टोर ने ग्राहक से ₹15 कैरी बैग शुल्क लिया था। आयोग ने इस मामले में भी कंपनी को ₹15,000 का मुआवजा और ₹11,000 कानूनी खर्च देने का निर्देश दिया।

उपभोक्ता मामलों के वकील ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह फैसला खुदरा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नजीर (precedent) स्थापित करता है। कंपनियां अक्सर यह तर्क देती हैं कि वे पर्यावरण संरक्षण के लिए शुल्क ले रही हैं, लेकिन आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कंपनी कैरी बैग प्रदान कर रही है, तो उसकी कीमत उत्पाद की लागत में शामिल होनी चाहिए, न कि ग्राहक पर थोपी जानी चाहिए। ₹15-18 जैसी छोटी राशि के लिए ₹26,000 का जुर्माना एक स्पष्ट संकेत है कि उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

उपभोक्ता आयोग ने सभी रिटेल चेन्स और स्टोर्स को चेतावनी दी है कि वे तुरंत इस तरह की अनुचित शुल्क वसूली बंद करें। आयोग ने कहा कि ग्राहक को खरीदारी के समय स्पष्ट रूप से विकल्प दिया जाना चाहिए कि वह अपना बैग लाएं, या फिर उन्हें कैरी बैग मुफ्त में उपलब्ध कराया जाए। इन फैसलों से यह सुनिश्चित होता है कि कैरी बैग को ‘पर्यावरण शुल्क’ के नाम पर जबरन बेचा नहीं जा सकता।

Sunil Yadav

सुनील यादव पिछले लगभग 15 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों में ( India Tv, Times Now,… More »
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