City Bus : गुरुग्राम में सिटी बसों के पहिये थमे, 4 दिनों से संचालन ठप्प, पैदल चलने को मजबूर यात्री
जीएमसीबीएल और बस ऑपरेटर के बीच 15 करोड़ के बकाया बिलों का विवाद, 18 रूटों पर यात्री बेहाल

City Bus/गुरुग्राम / फरीदाबाद:
गुरुग्राम और फरीदाबाद शहर में दैनिक यात्रियों की परेशानी चरम पर पहुँच गई है। पिछले चार दिनों से सिटी (City Bus) बसों का संचालन पूरी तरह ठप्प है, जिससे दफ्तरों, कॉलेजों और रोजमर्रा के काम पर निकलने वाले आम लोग भारी असुविधा का सामना कर रहे हैं। कई इलाकों में ऑटो का ज्यादा किराया न दे पाने के कारण यात्रियों को कड़कड़ाती धूप और गर्मी में मीलों पैदल जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
क्या है पूरा City Bus विवाद?
शहर में City Bus सेवा अचानक बंद होने की मुख्य वजह सरकारी एजेंसी और प्राइवेट बस ऑपरेटर के बीच चल रहा 15 करोड़ रुपये का वित्तीय विवाद है।
2019 में हुआ था समझौता: वर्ष 2019 में गुरुग्राम महानगर सिटी बस लिमिटेड (GMCBL) ने किलोमीटर स्कीम के तहत ‘गुरुग्राम सिटी ट्रांसपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड’ (GCTPL) के साथ 100 बसों के संचालन का करार किया था। बाद में इनमें से 50 बसें गुरुग्राम और 50 बसें फरीदाबाद के रूटों पर कर दी गईं।
बकाया भुगतान न होना: ऑपरेटर को प्रति किलोमीटर 96 रुपये के हिसाब से भुगतान किया जाना है। कंपनी का दावा है कि GMCBL पर पिछले छह महीनों से लगभग 15 करोड़ रुपये का बिल बकाया है।
सीएनजी का संकट: फंड न मिलने से बस ऑपरेटर वित्तीय संकट में आ गया है। कंपनी को खुद सीएनजी प्रदाता कंपनी का करीब 40 लाख रुपये चुकाना बाकी है, जिस वजह से बसों में ईंधन भरवाने का संकट खड़ा हो गया है।
डिपो में खड़ी रहीं City Bus, नोटिस देकर रोका संचालन
बकाये का भुगतान न होने पर बस ऑपरेटर कंपनी ने GMCBL को अंतिम चेतावनी (नोटिस) जारी की थी। भुगतान न मिलने पर कंपनी ने 9 अक्टूबर से गुरुग्राम और फरीदाबाद दोनों शहरों में बसों का परिचालन पूरी तरह बंद कर दिया। आलम यह है कि डिपो से एक भी बस बाहर नहीं निकल रही है।
City Bus के 18 प्रमुख रूट प्रभावित, ऑटो वाले वसूल रहे दोगुना किराया
सिटी बसें बंद होने से शहर के 18 मुख्य रूट पूरी तरह प्रभावित हो चुके हैं:
गुरुग्राम: मिलेनियम सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन से सेक्टर-50 और सोहना बस स्टैंड जाने वाले यात्रियों को कोई साधन नहीं मिल रहा।
फरीदाबाद: बड़खल बॉर्डर से बल्लभगढ़, बदरपुर बॉर्डर और मछावली चौक जैसे व्यस्त रूटों पर बसों का नामोनिशान नहीं है।
City Bus की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर स्थानीय ऑटो व ई-रिक्शा चालक यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। जो लोग ऑटो का बढ़ा हुआ किराया देने में असमर्थ हैं, उन्हें मजबूरन पैदल ही अपनी मंजिल की ओर बढ़ना पड़ रहा है।
प्रशासन का पक्ष:
GMCBL के सीईओ विश्वजीत चौधरी ने वित्तीय विवाद पर सीधा बयान देने से परहेज किया है, लेकिन उन्होंने यात्रियों को आश्वासन दिया है कि मामले को जल्द सुलझाकर बसों का संचालन फिर से शुरू कराया जाएगा।
बहरहाल, जब तक दोनों पक्षों के बीच बकाये का निपटारा नहीं होता, तब तक आम जनता को सड़कों पर ऐसे ही धक्के खाने पड़ सकते हैं।
