BIG News : सुप्रीम कोर्ट का ‘हथौड़ा’ चला ! DLF के गुरुग्राम प्रोजेक्ट की CBI जांच के आदेश, सरकारी अधिकारी भी घेरे में

BIG News : देश की सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने गुरुग्राम में बिल्डरों द्वारा निवेशकों के साथ की जाने वाले कथित धोखाधड़ी और वादाखिलाफी के खिलाफ एक मिसाल देने वाला आदेश दिया है । सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों को राहत देते हुए गुरुग्राम के सेक्टर 82A में DLF के The Primus DLF Garden City प्रोजेक्ट की CBI जांच के आदेश जारी किए हैं । कोर्ट ने मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि ये मामला शायद एक बड़ी समस्या का सिर्फ एक सिरा (Tip Of The Iceberg) है ।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि यह केवल एक बार होने वाली घटना नहीं लगती। कोर्ट ने कहा कि देश में कई लोग अपनी पूरी जीवन भर की पूंजी एक घर खरीदने में लगा देते हैं, वह भी अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर । फिर भी वे अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाते । संगठित रियल एस्टेट क्षेत्र में ऐसी घटनाएं आम लोगों की दुर्दशा को दर्शाती हैं । (Big News)
क्या होगा CBI जांच में ?
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद को DLF के प्रोजेक्ट की CBI जांच के लिए एक डेडिकेटेड टीम बनाने का निर्देश दिया है । CBI को निर्देश दिए हैं कि इस मामले में जांच की जाए कि बिल्डर द्वारा निवेशकों से क्या क्या वादे किए और कितने वादे पूरे किए गए । इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा है कि कई सालों तक Regulatory Authorities के चक्कर काटने के बाद भी मामले का समाधान ना होने पर अधिकारियों की क्या जिम्मेदारियां रहीं ? क्या उन्होनें अपनी जिम्मेदारिया निभाईं या नहीं ? (Gurugram News)
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सुप्रीम कोर्ट की रडार पर ‘अधिकारी’ भी
कोर्ट सिर्फ DLF तक नहीं रुका । बेंच ने सवाल उठाया कि रेगुलेटरी अथॉरिटीज़ (Authorities) क्या कर रही थीं? क्या अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई या वे भी इस धांधली का हिस्सा थे? सीबीआई अब इन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करेगी ।
सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों को राहत देते हुए कहा है कि इस मामले की जांची सीधे CBI की टीम डायरेक्टर की निगरानी में जांच करेगी और निदेशक को इस मामले में जांच करने की पूर्ण स्वतंत्रता होगी । (Big News)
क्या है पूरा मामला ? (DLF The Primus Project Dispute)
आखिर सुप्रीम कोर्ट ने DLF के खिलाफ CBI जांच के आदेश क्यों दिए हैं । निवेशकों को अपने अधिकारों के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाना पड़ा । दरअसल ये पूरा विवाद गुरुग्राम के सेक्टर 82 A में DLF के The Primus Project से जुड़ा हुआ है जो कि साल 2012 में लॉन्च किया गया था ।
निवेशकों ने आरोप लगाया है कि इस प्रोजेक्ट के खरीददारों को साल 2016 में पजेशन मिलना था लेकिन प्रोजेक्ट समय पर पूरा ही नहीं हुआ । निवेशकों ने आरोप लगाए कि अक्टूबर 2016 तक केवल आंशिक अधिभोग प्रमाणपत्र जारी किया, प्रोजेक्ट में ना तो स्थायी बिजली कनेक्शन था और पानी के कनेक्शन भी गायब थे । आरोप तो ये भी है कि प्रोजेक्ट बेचते वक्त जिस 24 मीटर की अप्रोच रोड़ का वादा किया था वो सड़क असीलियत में है ही नहीं । (Gurugram News)
NCDRC के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
इससे पहले 2023 में NCDRC (राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग) ने डीएलएफ की सेवाओं में कमी और ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ की बात मानी थी । हालांकि, घर खरीदार आयोग के निर्देशों का पालन न होने पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे । कोर्ट ने याचिकाकर्ता रोहित भयाना को 1 लाख रुपये मुकदमेबाजी का खर्च देने का भी निर्देश दिया है । (Big News)
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए CBI को अपनी जांच रिपोर्ट 25 अप्रैल, 2026 तक पेश करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को निर्धारित की गई है । यह आदेश उन हजारों घर खरीदारों के लिए उम्मीद की किरण है जो बिल्डरों और सिस्टम की सुस्ती के बीच फंसे हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट का रुख स्पष्ट है कि आम आदमी की गाढ़ी कमाई के साथ धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर DLF कंपनी की प्रवक्ता टीम से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई लेकिन DLF की तरफ से इस मामले में कोई बयान नहीं आया ।