Air Pollution : गुरुग्राम और मानेसर नगर निगम को कारण बताओ नोटिस, मलबे ने बढ़ाई शहर की घुटन
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह सीएंडडी वेस्ट मैनेजमेंट रूल 2016 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम का सीधा उल्लंघन है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दोनों निगमों को जवाब देने के लिए 15 दिन की मोहलत दी है।

Air Pollution : गुरुग्राम और मानेसर की हवा में घुलते धीमे जहर के बीच हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) ने दोनों नगर निगमों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की टीम द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में प्रदूषण नियंत्रण के दावों की पोल खुल गई है, जिसके बाद दोनों निकायों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
बीती 17 और 18 दिसंबर को CPCB की टीम ने शहर के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया था। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि गुरुग्राम के नरसिंहपुर, खेड़की दौला, बादशाहपुर और सेक्टर-37 जैसे प्रमुख इलाकों में निर्माण एवं ध्वस्तीकरण कचरे (C&D Waste) के बड़े-बड़े ढेर सड़कों किनारे पड़े हैं। वहीं, मानेसर के द्वारका एक्सप्रेस-वे और NH-48 पर धूल उड़ती मिली, जो वायु गुणवत्ता को खतरनाक स्तर पर ले जा रही है।
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह सीएंडडी वेस्ट मैनेजमेंट रूल 2016 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम का सीधा उल्लंघन है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दोनों निगमों को जवाब देने के लिए 15 दिन की मोहलत दी है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो लापरवाह अधिकारियों का एक महीने का वेतन काटने की सिफारिश की जा सकती है।
हैरानी की बात यह है कि शहर में ग्रैप (GRAP) के कड़े चरण लागू होने के बावजूद निगम प्रशासन मलबे के वैज्ञानिक निस्तारण और धूल को दबाने के लिए पानी के छिड़काव में विफल रहा है। बोर्ड ने उन एजेंसियों और अधिकारियों की सूची भी तलब की है, जिनकी जिम्मेदारी इन क्षेत्रों में निगरानी रखने की थी।GRA

निरीक्षण की तारीख: 17 और 18 दिसंबर (CPCB की टीम द्वारा)।
प्रभावित इलाके (गुरुग्राम): नरसिंहपुर, खेड़की दौला, सेक्टर-37, 74, बादशाहपुर और दरबारीपुर।
प्रभावित इलाके (मानेसर): द्वारका एक्सप्रेस-वे, सेक्टर 80, 83-84 और नेशनल हाईवे-48।
संभावित कार्रवाई: 15 दिन में जवाब न देने पर वेतन कटौती और कानूनी कार्रवाई।
प्रदूषण बोर्ड की इस सख्ती से निगम प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। अब देखना यह होगा कि क्या 15 दिनों के भीतर ये मलबे हटाए जाते हैं या फिर अधिकारियों को भारी दंड भुगतना पड़ेगा। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कागजों पर कार्रवाई के बजाय जमीन पर सफाई दिखनी चाहिए।













