Aravali को निहारने का नया केंद्र: मांगर बनी में बनेंगे दो वॉच टावर, पर्यटक और वन अधिकारी दोनों रखेंगे निगरानी
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पहले ही लेपर्ड ट्रेल के रास्ते में अच्छी सड़क का निर्माण किया जा चुका है, जिससे पर्यटक अरावली की सुंदरता का अनुभव कर सकें।

Aravali : वन्य जीव विभाग गुरुग्राम और फरीदाबाद के बीच स्थित मांगर बनी के सघन वन क्षेत्र में दो नए वॉच टावर बनाने की तैयारी कर रहा है। लगभग 30 से 35 फीट ऊंचे इन टावरों का दोहरा उद्देश्य है: जहां एक ओर वन अधिकारी वन्य जीवों और अरावली की गतिविधियों पर पैनी नज़र रख सकेंगे, वहीं दूसरी ओर पर्यटक भी इस प्राचीन पर्वत श्रृंखला के नैसर्गिक सौंदर्य और जैव विविधता को सुरक्षित दूरी से निहार सकेंगे।
वन्य जीव अधिकारी ने बताया कि दोनों वॉच टावरों के लिए निविदा प्रक्रिया (टेंडर) जारी है। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि तेंदुए जैसे हिंसक जीवों की मौजूदगी के कारण आम लोग अरावली के अंदर जाकर प्राकृतिक दृश्यों का लुत्फ़ उठाने से कतराते हैं। करीब 1500 वर्ग किलोमीटर में फैला मांगर बनी क्षेत्र अरावली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पशु-पक्षियों की एक बड़ी संख्या का घर है।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पहले ही लेपर्ड ट्रेल के रास्ते में अच्छी सड़क का निर्माण किया जा चुका है, जिससे पर्यटक अरावली की सुंदरता का अनुभव कर सकें। हालांकि, वन्य जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मानेसर की ओर अरावली क्षेत्र को संरक्षित करने हेतु दीवार बनाने की योजना भी है। इसका मुख्य लक्ष्य वन्य जीवों को सड़क पर आने से रोकना और उन्हें दुर्घटनाग्रस्त होने से बचाना है।
पर्यावरण एक्टिविस्ट ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा, “मांगर बनी में वॉच टावर बनने से अरावली की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। अवैध खनन, पेड़ काटे जाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगेगी। साथ ही, पर्यटन को भी काफी फायदा होगा, जिससे आम लोगों के लिए अरावली की सुंदरता और वन्य जीवों का दीदार करना सुलभ हो जाएगा।”
वन्य जीव विभाग जल्द ही अरावली में वन्य जीवों का एक व्यापक सर्वेक्षण भी कराएगा। अधिकारी जांगड़ा के अनुसार, वर्ष 2017 के बाद वन्य जीवों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, खासकर तेंदुओं की संख्या में। वर्ष 2017 के सर्वेक्षण में गुरुग्राम की अरावली में 31 तेंदुए, 126 लकड़बग्घे और 3 भेड़िए जैसे मांसाहारी जीव पाए गए थे। इसके अलावा, 166 गीदड़, 91 सेहली और 61 बिज्जू सहित अन्य वन्य जीव भी दर्ज किए गए थे। वर्ष 2020 का सर्वेक्षण हुआ था, लेकिन भारतीय वन्य जीव संस्थान, देहरादून द्वारा इसकी रिपोर्ट अभी जारी नहीं की गई है।
वन विभाग के पिछले सर्वेक्षणों से पता चलता है कि अरावली 180 किस्मों के पक्षियों, 15 स्तनधारियों, 29 जलीय जीवों और 57 तितलियों की प्रजातियों का आश्रय स्थल है।
अरावली का यह क्षेत्र केवल वन्य जीवन के लिए ही नहीं, बल्कि पुरातात्विक महत्व के लिए भी जाना जाता है। गुरुग्राम और फरीदाबाद की अरावली के कई हिस्सों में 80 हजार साल पुरानी मानवीय सभ्यता के अवशेष मिले हैं। मांगर, सिलाखड़ी, मोहब्बताबाद, धौज और दमदमा जैसी पहाड़ियों पर पुरा पाषाणकाल के निशान मौजूद हैं। पुरातत्व विभाग ने इन शैल चित्रों का दस्तावेजीकरण भी किया है।