Thieves Village : मेवात के ‘चोर गांवों’ को 250 पुलिसकर्मियों ने घेरा; शातिर चोर ‘रस्सी’ और ‘सुमा’ समेत कई गिरफ्तार

बाइक चोरी के 'इंटरस्टेट रैकेट' का भंडाफोड़: क्राइम ब्रांच के 250 जवानों और SWAT टीम का नूंह में बड़ा एक्शन

Thieves Village : साइबर सिटी गुरुग्राम में वाहन चोरी की वारदातों पर लगाम लगाने के लिए गुरुग्राम पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुलिस के करीब 250 जवानों और दो विशेष स्वात (SWAT) टीमों ने पिछले हफ्ते नूंह (मेवात) के कई Thieves Village ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस बड़े ऑपरेशन का मकसद उस अंतरराज्यीय (Cross-Border) रैकेट को पूरी तरह ध्वस्त करना था, जो गुरुग्राम शहर से होने वाली कुल बाइक चोरियों में से अकेले 60% वारदातों के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

इस संयुक्त और योजनाबद्ध कार्रवाई के दौरान पुलिस ने नूंह के पुन्हाना ब्लॉक के जमालगढ़ गांव और तावडू तहसील के पचगांव में एक साथ रेड की। पुलिस के मुताबिक, ये दोनों गांव गुरुग्राम से चुराई गई मोटरसाइकिलों को छिपाने और ठिकाने लगाने (डिस्पोजल) के सबसे बड़े केंद्र बने हुए थे। मौके से पुलिस ने चोरी की मोटरसाइकिलें खरीदने वाले 4 संदिग्ध रिसीवरों को गिरफ्तार किया है और कई अन्य को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।

₹1 लाख की बाइक सिर्फ ₹4000-6000 में सौदा! : Thieves Village

पुलिस जांच में इस सिंडिकेट को लेकर बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। गुरुग्राम के शहरी इलाकों से चुराई गई जिन मोटरसाइकिलों की कीमत बाजार में ₹1 लाख या उससे अधिक होती है, उन्हें इस ग्रे-मार्केट (चोरी के बाजार) में कौड़ियों के भाव यानी महज 4,000 से 6,000 रुपये में बेच दिया जाता था।


सालाना 1,200 बाइकें सिर्फ नूंह रीजन में खप रहीं:
गुरुग्राम पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, शहर से हर साल लगभग 2,000 मोटरसाइकिलें चोरी होती हैं। इस संगठित और गहराई तक फैले नेटवर्क के कारण, इनमें से लगभग 1,200 मोटरसाइकिलें अकेले नूंह और उसके आसपास के इलाकों में चोरी और डिस्पोजल की इस चेन के जरिए पहुंचाई जा रही थीं।

Thieves Village : क्या है इनका मॉडस ऑपेरंडी (काम करने का तरीका)?

पूछताछ में सामने आया कि इस गैंग का नेटवर्क गुरुग्राम से लेकर नूंह और राजस्थान के कुछ हिस्सों तक फैला हुआ है।

  • रेकी और चोरी: गैंग के सदस्य खुद असली मोटरसाइकिलों या ऑटो-रिक्शा में बैठकर गुरुग्राम शहर के विभिन्न इलाकों में आते थे। वे सड़कों के किनारे या घरों के बाहर पार्क की गई गाड़ियों की पहचान करते (रेकी करते) और मौका मिलते ही पलक झपकते ही बाइक चुराकर फरार हो जाते थे।

  • स्प्लेंडर और डीलक्स पहली पसंद: चोरों की पहली पसंद ‘हीरो’ कंपनी की मोटरसाइकिलें, खासकर ‘स्प्लेंडर’ और ‘डीलक्स’ मॉडल होते थे। ग्रे-मार्केट में इन मॉडल्स की मांग सबसे ज्यादा है।

  • नंबरों से छेड़छाड़: चोरी के तुरंत बाद इन बाइकों को नूंह के गांवों में लाया जाता था, जहां इनके चेसिस और इंजन नंबरों को पूरी तरह से मिटा या बदल (Tamper) दिया जाता था।

  • खरीदार कौन हैं?: इन नंबरों को बदलने के बाद बाइकों को नूंह के पहाड़ी इलाकों और राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले दिहाड़ी मजदूरों को बहुत ही कम दामों पर बेच दिया जाता था, क्योंकि वहां सस्ती मोटरसाइकिलों की भारी डिमांड रहती है।

कुख्यात ‘रस्सी’ और ‘सुमा’ समेत कई गिरफ्तार : Thieves Village

पुलिस ने इस छापेमारी के दौरान पचगांव से दो शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान राशिद (30 वर्ष) उर्फ रस्सी और अनीश (24 वर्ष) उर्फ सुमा के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से चोरी की 8 मोटरसाइकिलें बरामद की हैं, जिन्हें साल 2025-26 के दौरान गुरुग्राम के शिवाजी नगर और मानेसर इलाकों से चुराया गया था।

पकड़ा गया आरोपी राशिद उर्फ रस्सी बेहद शातिर अपराधी है, जिसकी गुरुग्राम शहर में ही वाहन चोरी के 13 मामलों में पुलिस को तलाश थी। वहीं दूसरे आरोपी अनीश के खिलाफ पहले से ही तीन मामले दर्ज हैं, जिनमें दो वाहन चोरी के और एक आर्म्स एक्ट (अवैध हथियार रखने) का मामला शामिल है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन गिरफ्तारियों के बाद आने वाले दिनों में वाहन चोरी के कई और बड़े मामलों का खुलासा होने की उम्मीद है।

Manu Mehta

मनु मेहता पिछले लगभग 18 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों (ANI News, News Express, TV 9,… More »
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