Railways Fact रेलवे स्टेशन के पीले बोर्ड पर क्यों लिखा होता है ‘समुद्र तल से ऊंचाई’?

लोको पायलट के लिए क्यों जरूरी है यह मामूली सा दिखने वाला आंकड़ा? जानें रेल सफर से जुड़ा यह दिलचस्प राज

Railways Fact  ; Indian Railway  की हर छोटी-बड़ी चीज के पीछे कोई न कोई ठोस वैज्ञानिक या तकनीकी वजह छिपी होती है। अक्सर जब हम स्टेशन पर अपनी ट्रेन का इंतजार करते हैं, तो पीले रंग के बड़े साइन बोर्ड पर शहर के नाम के ठीक नीचे लिखी एक बारीक लाइन ‘समुद्र तल से ऊंचाई’ (Mean Sea Level) पर हमारी नजर जरूर पड़ती है। भले ही एक आम यात्री के लिए यह महज एक आंकड़ा हो, लेकिन ट्रेन के सफर को सुरक्षित बनाने में इसका बहुत बड़ा योगदान रहा है।
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दरअसल, यह जानकारी खास तौर पर ट्रेन के लोको पायलट (ड्राइवर) और गार्ड के लिए लिखी जाती है। मान लीजिए ट्रेन 200 मीटर की ऊंचाई वाले स्टेशन से चलकर 250 मीटर की ऊंचाई वाले स्टेशन की ओर बढ़ रही है, तो चालक को यह संकेत मिल जाता है कि आगे चढ़ाई है। ऐसे में उसे इंजन की पावर (Thrust) कितनी बढ़ानी है, यह तय करने में मदद मिलती है। इसी तरह, ढलान पर आते समय उसे अंदाजा मिल जाता है कि ब्रेक का इस्तेमाल और गति का नियंत्रण किस तरह करना है।

 

इतना ही नहीं, पटरियों को बिछाने और स्टेशन के आसपास की इमारतों व बिजली के तारों (OHE) के सेटअप के लिए भी समुद्र तल से औसत ऊंचाई का डेटा बेहद जरूरी होता है। हालांकि, आज के आधुनिक दौर में ट्रेनों के इंजन हाई-टेक सेंसर्स और ऑटोमैटिक स्पीड मॉनिटरिंग सिस्टम से लैस हैं, इसलिए अब बन रहे नए स्टेशनों के बोर्ड से धीरे-धीरे यह जानकारी गायब होने लगी है। लेकिन पुराने बोर्ड आज भी भारतीय रेल के गौरवशाली इतिहास और इंजीनियरिंग की बारीकी की कहानी बयां करते हैं।

Manu Mehta

मनु मेहता पिछले लगभग 18 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों (ANI News, News Express, TV 9,… More »
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