गुड़गांव: धनकोट नहर की सफाई में निकला ‘खजाना'(Treasure), कीचड़ से सिक्के बटोरने की मची होड़

आस्था की भेंट या किस्मत का खेल? जेसीबी जब निकाल रही थी नहर की गंदगी, तब चमक उठे लोगों के चेहरे

धनकोट नहर से निकला खजाना(Treasure), लूटने वालों की लगी होड़

 

गुड़गांव :दिल्ली से सटे साइबर सिटी गुड़गांव में इन दिनों एक अजीबोगरीब नजारा देखने को मिल रहा है। शहर को पेयजल की आपूर्ति करने वाली धनकोट नहर की वार्षिक सफाई का काम चल रहा है, लेकिन यह सफाई अभियान केवल गंदगी हटाने तक सीमित नहीं रह गया है। नहर की गहराई से निकल रहे कीचड़ में सिक्के और ‘खजाना’ मिलने की खबर ने स्थानीय लोगों और राहगीरों के बीच हलचल पैदा कर दी है।

कीचड़ में चमकती किस्मत

जैसे ही भारी-भरकम जेसीबी (JCB) और पोकलैंड मशीनें नहर की तलहटी से काला कीचड़ निकालकर बाहर फेंकती हैं, वहां मौजूद लोगों का हुजूम उस पर टूट पड़ता है। दरअसल, इस कीचड़ में एक, दो, पांच और दस रुपये के सिक्कों की भरमार है। देखते ही देखते यह स्थान एक कौतूहल का केंद्र बन गया है, जहां बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी अपने हाथों को कीचड़ में सानकर ‘खजाना’ ढूंढते नजर आ रहे हैं।

धार्मिक आस्था से जुड़ा है यह ‘खजाना’

नहर से निकलने वाले इन सिक्कों के पीछे कोई रहस्यमयी कहानी नहीं, बल्कि आम जनमानस की गहरी धार्मिक आस्था है। हिंदू परंपराओं के अनुसार, घर या मंदिरों में होने वाले शुभ कार्यों और पूजा-पाठ के बाद बची हुई पूजन सामग्री, फूल-मालाएं और अक्षत को बहते जल में प्रवाहित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

श्रद्धालु जब धनकोट नहर में यह पूजन सामग्री प्रवाहित करते हैं, तो वे अपनी मन्नत के साथ जल में सिक्के भी डालते हैं। हालांकि, नहर के किनारे हमेशा कुछ कुशल गोताखोर और तैराक मौजूद रहते हैं जो तुरंत इन सिक्कों को निकाल लेते हैं, लेकिन पानी के तेज बहाव और गहराई के कारण बहुत से सिक्के नहर की तली में कीचड़ के साथ जमा हो जाते हैं। अब सफाई के दौरान वही सिक्के सालों बाद बाहर निकल रहे हैं।

तैराकों और स्थानीय लोगों की लगी लॉटरी

नहर के पास मौजूद चश्मदीदों का कहना है कि यह नजारा हर साल सफाई के दौरान देखने को मिलता है। मशीनें जैसे ही कीचड़ किनारे डालती हैं, लोग उसमें से सिक्के बीनने लगते हैं।

  • मुस्तैद तैराक: जो तैराक पूरे साल पानी के अंदर से पैसे निकालने की कोशिश करते हैं, उनके लिए यह समय सबसे ज्यादा कमाई वाला साबित हो रहा है।

  • भीड़ का प्रबंधन: लोगों का हुजूम इतना बढ़ गया है कि मशीनों के काम में भी कभी-कभी बाधा आ जाती है, लेकिन ‘किस्मत आजमाने’ के इस खेल में हर कोई व्यस्त है।

प्रशासन की चेतावनी और सफाई कार्य

नहर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नहर की समय-समय पर सफाई अनिवार्य है। मशीनों के पास लोगों की इस तरह की भीड़ कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मशीनों के करीब न जाएं।

वहीं, पर्यावरणविदों का कहना है कि पूजन सामग्री के साथ-साथ प्लास्टिक और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल चीजें नहर में डालना जल प्रदूषण का बड़ा कारण बनता है। हालांकि, फिलहाल तो धनकोट नहर की यह ‘सिक्कों वाली कीचड़’ चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे अपनी मेहनत का फल या भगवान का आशीर्वाद मानकर बटोरने में लगे हैं।

Manu Mehta

मनु मेहता पिछले लगभग 18 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों (ANI News, News Express, TV 9,… More »
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