Serial Rapist Arrest 24 से ज्यादा दिव्यांग महिलाओं की जिंदगी नर्क बनाने वाला सीरियल रेपिस्ट गिरफ्तार
16 साल का सन्नाटा और पत्थर हुई चीखें: एक मूक-बधिर बेटी के साहस ने सलाखों के पीछे पहुँचाया 'दरिंदे' को

Serial Rapist Arrest मुंबई : कहते हैं कि न्याय की चक्की धीरे चलती है, लेकिन जब चलती है तो बड़े से बड़े अपराधी का अहंकार चकनाचूर हो जाता है। मुंबई में एक ऐसी ही हृदयविदारक लेकिन साहस से भरी घटना सामने आई है, जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया है। एक मूक-बधिर (बोलने और सुनने में अक्षम) महिला ने अपनी 16 साल पुरानी खामोशी को तोड़कर एक ऐसे सीरियल रेपिस्ट का पर्दाफाश किया है, जो सालों से दिव्यांग महिलाओं को अपनी हवस और लालच का शिकार बना रहा था.
अंधेरे कमरे की वो खौफनाक शुरुआत
यह कहानी शुरू होती है साल 2009 में. उस वक्त पीड़िता महज एक नाबालिग बच्ची थी. आरोपी महेश पवार ने उसकी मासूमियत का फायदा उठाते हुए उसे नशीला पदार्थ खिलाया और उसके साथ घिनौना कृत्य किया. वह बच्ची चीखना चाहती थी, लेकिन कुदरत ने उसे आवाज नहीं दी थी। वह मदद मांगना चाहती थी, लेकिन समाज की बेरुखी और आरोपी के डर ने उसे चुप करा दिया। आरोपी सिर्फ शारीरिक शोषण तक नहीं रुका, उसने पीड़िता के अश्लील वीडियो बनाए और उन्हें हथियार बनाकर उसे 16 सालों तक ब्लैकमेल करता रहा.
एक ‘व्हाट्सएप कॉल’ जिसने बदली जिंदगी
बीते कई सालों से आरोपी महेश पवार न केवल महिलाओं का यौन शोषण कर रहा था, बल्कि उनसे पैसे, सोने के गहने और मोबाइल फोन भी छीन लेता था. वह इतना क्रूर था कि मूक-बधिर महिलाओं को मजबूर करके उनसे ‘न्यूड वीडियो कॉल’ करवाता और फिर उन्हें भी रिकॉर्ड कर लेता था.हाल ही में, जब इस शोषण से तंग आकर एक अन्य महिला ने आत्महत्या की कोशिश की, तो पीड़िता का धैर्य जवाब दे गया. उसने तय किया कि अब और नहीं। उसने हिम्मत जुटाई और एक व्हाट्सएप ग्रुप पर अपने दोस्तों और सहकर्मियों के साथ वीडियो कॉल के जरिए ‘साइन लैंग्वेज’ (इशारों की भाषा) में अपनी पूरी आपबीती सुनाई. उन कांपते हाथों ने जब 16 साल का दर्द इशारों में पिरोया, तो सुनने और देखने वालों की रूह कांप गई.
कानून का शिकंजा और न्याय की उम्मीद
पीड़िता ने सबसे पहले अपने पति को विश्वास में लिया और फिर एक सामाजिक संस्था की मदद से पुलिस तक पहुँची. कुरार पुलिस स्टेशन में एक इंटरप्रेटर (इशारों को समझाने वाला विशेषज्ञ) की मदद से बंद कमरे में महिला का बयान दर्ज किया गया. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी महेश पवार को 13 दिसंबर को विरार से गिरफ्तार कर लिया.
पीड़ितों की संख्या 24 के पार होने की आशंका
पुलिस की प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। अभी तक 7 महिलाओं के साथ शोषण के पुख्ता सबूत मिले हैं, लेकिन पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह संख्या 24 से भी ज्यादा हो सकती है. आरोपी जानबूझकर ऐसी महिलाओं को चुनता था जो बोल या सुन नहीं सकती थीं, क्योंकि उसे लगता था कि वे कभी किसी को कुछ बता नहीं पाएंगी.
निष्कर्ष: यह मामला केवल एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि उस साहस की जीत है जो खामोशी की जंजीरों को तोड़कर बाहर आया है। आज वह महिला भले ही बोल नहीं सकती, लेकिन उसके साहस की गूँज पूरे देश में सुनाई दे रही है। समाज के लिए यह सोचने का वक्त है कि हम अपने बीच के इन ‘दिव्यांग’ हीरों को कितना सुरक्षित माहौल दे पा रहे हैं।









