Bulldozer : पीले पंजे का कहर, 60 साल की सेवा का यह कैसा इनाम ?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जिला संघ संचालक की सड़क से 40 फुट दूर दुकान पर चलाया बुलडोजर

Bulldozer : गुरुग्राम में नगर निगम के पीले पंजे (बुलडोजर) का कहर ऐसा बरपा कि उसने किसी की भी परवाह नहीं की। इस बार इसका शिकार बने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जिला संघ संचालक जगदीश ग्रोवर, जिन्होंने अपनी जिंदगी के 60 साल संघ की सेवा में लगा दिए।
यह घटना सिर्फ एक तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं है, बल्कि उस भावना पर एक गहरा आघात है, जो दशकों की निस्वार्थ सेवा से जुड़ी है। संघ संचालक जगदीश ग्रोवर की हार्डवेयर की दुकान का वह हिस्सा, जिसे सड़क से 40 फुट दूर होने के बावजूद तोड़ दिया गया, सिर्फ ईंट और सीमेंट का ढाँचा नहीं था। वह उनकी मेहनत, उनका सहारा और शायद उनकी पहचान का हिस्सा था।

नगर निगम के असिस्टेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार के नेतृत्व में सेक्टर 7 में हुई इस कार्रवाई ने दुकानदारों की गुहार को अनसुना कर दिया। दुकानदारों का दर्द साफ़ झलक रहा था। उन्होंने बार-बार यह समझाया कि ये दुकानें सड़क से बहुत दूर हैं और किसी भी तरह की बाधा नहीं बनती, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। यह देखकर मन में सवाल उठता है: क्या नियम-कानून सिर्फ दिखावे के लिए हैं? क्या किसी की मेहनत को पल भर में मिट्टी में मिलाना न्याय है?
यह कार्रवाई सिर्फ एक दुकान पर नहीं, बल्कि ‘पिक एंड चूज’ (Pick and Choose) की नीति पर भी सवाल उठाती है। दुकानदारों का आरोप है कि अगर कोई रिश्वत दे दे, तो बुलडोजर का रुख बदल जाता है। यह आरोप उन अधिकारियों की नीयत पर संदेह पैदा करता है, जो बिना किसी पक्षपात के काम करने की शपथ लेते हैं।

दुकानदारों ने गुरुग्राम के न्यू कॉलोनी मोड़ पर मीट की दुकानों का उदाहरण दिया, जिन्होंने 20 फुट तक सड़क पर कब्जा कर रखा है, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। यह दिखाता है कि एक तरफ गरीबों और छोटे दुकानदारों को निशाना बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रभावशाली लोगों को छोड़ दिया जाता है। क्या ‘गरीब हटाओ, अमीर बचाओ’ की यही नीति है ?
यह तोड़फोड़ सिर्फ एक शेड या चबूतरे को नहीं तोड़ती, बल्कि उन लोगों के विश्वास को तोड़ती है जो सोचते हैं कि कानून सबके लिए बराबर है। यह एक दर्दनाक सवाल छोड़ जाती है, 60 साल की सेवा का यही इनाम है ?










