गुरुग्राम की सोसायटियों में Rainwater Harvesting अनिवार्य, एंबियंस मॉल के पास बनेगी आर्टिफिशियल झील
नीति आयोग की उच्चस्तरीय बैठक में बनी ठोस कार्ययोजना; मास्टर प्लान के ओपन स्पेस का होगा जल संरक्षण के लिए उपयोग, आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों ने साझा किए सुझाव

Rainwater Harvesting/गुरुग्राम
साइबर सिटी गुरुग्राम में मानसून के दौरान हर साल लगने वाले भीषण जाम और जलभराव की समस्या से स्थायी रूप से निपटने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। शहर में बरसाती पानी के प्रभावी संचयन (Rainwater Harvesting) और जल संरक्षण को लेकर एक ठोस और दूरदर्शी कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
हाल ही में नई दिल्ली स्थित नीति आयोग में केंद्रीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें शहर के जल प्रबंधन को सुधारने के लिए कई कड़े और बड़े फैसले लिए गए।
सोसायटियों और कमर्शियल परिसरों में रेRainwater Harvesting अनिवार्य
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि गुरुग्राम की सभी आवासीय सोसायटियों, कमर्शियल परिसरों, शिक्षण संस्थानों, HSVP सेक्टरों और अन्य सरकारी व निजी परिसरों में Rainwater Harvesting System को सख्ती से अनिवार्य किया जाएगा। नियमों का पालन न करने वालों पर प्रशासन की ओर से कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
एंबियंस मॉल के पास और निचले इलाकों में बनेंगी कृत्रिम झीलें
जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए कृत्रिम झीलें (Artificial Lakes) बनाने की योजना पर मुहर लगी है:
एंबियंस मॉल के पास झील: केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने एंबियंस मॉल के समीप कृत्रिम झील बनाने की वकालत करते हुए इसे जल्द मंजूरी देने की मांग की। मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव (CPS) राजेश खुल्लर ने इस पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए चंडीगढ़ में पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा कर जल्द अनुमति दिलाने का आश्वासन दिया।
दौलतबाद, खिड़की माजरा और चंदू गांव: बारिश के दिनों में जलभराव से प्रभावित रहने वाले इन गांवों के आसपास किसानों की जमीन का मुद्दा भी उठाया गया। सरकार किसानों की सहमति से जमीन को लीज पर लेकर या उचित मुआवजा तय करके वहां कृत्रिम झीलें बनाने पर विचार कर रही है, जिससे अतिरिक्त पानी को सहेजा जा सके।
Rainwater Harvesting : आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ तैयार करेंगे योजनाएं
बैठक में शामिल आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों ने प्रेजेंटेशन देते हुए बताया कि गुरुग्राम की वर्तमान जनसंख्या और उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों में बड़ा अंतर है। इसे ध्यान में रखते हुए शहर की वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार अल्पकालीन (Short-term) और दीर्घकालीन (Long-term) योजनाएं बनाने की जरूरत है। जीएमडीए (GMDA) और नगर निगम गुरुग्राम (MCG) की एजेंसियों ने भी अपने बहुमूल्य सुझाव इस दौरान साझा किए।
इसके अलावा, मास्टर प्लान के तहत छोड़ी गई ओपन स्पेस (खुली जमीन) का उपयोग भी Rainwater Harvesting और रिचार्ज स्ट्रक्चर तैयार करने के लिए किया जाएगा। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अधिकारियों को इस दिशा में जल्द काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
