हरियाणा में Stilt+4 Floor Policy पर हाई कोर्ट की रोक: स्वतंत्र प्लॉट मालिक और छोटे बिल्डरों को बड़ा झटका
बड़े बिल्डरों को मिल सकता है फायदा; कोर्ट ने कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर और जनसुरक्षा को बताया बड़ी चुनौती

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार की विवादित Stilt+4 Floor Policy (S+4) रिहायशी निर्माण नीति पर कड़ा रुख अपनाते हुए फिलहाल रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजिव बेरी की पीठ ने 2 अप्रैल को यह अंतरिम आदेश जारी किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 8 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई तक राज्य सरकार इस नीति के तहत नए निर्माण की अनुमति नहीं दे सकेगी।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता दबाव और सुरक्षा जोखिम
अदालत ने सुनवाई के दौरान गुरुग्राम के मौजूदा बुनियादी ढांचे की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट द्वारा नियुक्त कमेटी की रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
सड़कों की चौड़ाई में कमी: डीएलएफ फेज-1 और सेक्टर-28 जैसे पॉश इलाकों में 10-12 मीटर चौड़ी सड़कें अतिक्रमण और अनियंत्रित निर्माण के कारण महज 3.9 से 4.8 मीटर रह गई हैं।
क्षमता ऑडिट की अनदेखी: सरकार ने विशेषज्ञ समिति की उस सिफारिश को नजरअंदाज किया, जिसमें कहा गया था कि चौथी मंजिल की अनुमति देने से पहले पानी, सीवरेज, ड्रेनेज और फायर सेफ्टी का ‘कैपेसिटी ऑडिट’ अनिवार्य होना चाहिए।
राजस्व बनाम सुरक्षा: कोर्ट ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार ने राजस्व बढ़ाने के चक्कर में नागरिकों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण देने की अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी को ताक पर रख दिया।
बाजार समीकरण: छोटे बिल्डरों को झटका, बड़े समूहों की चांदी
इस नीति पर रोक लगने से रियल एस्टेट बाजार के समीकरण पूरी तरह बदलने की उम्मीद है:
छोटे बिल्डरों की बढ़ी मुश्किलें: गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहरों में छोटे बिल्डर और स्वतंत्र प्लॉट मालिक चौथे फ्लोर को बेचकर अपना मुनाफा निकालते थे। अब रोक लगने से उनके प्रोजेक्ट्स बीच में लटक सकते हैं और उनकी वित्तीय योजनाएं चरमरा सकती हैं।
बड़े बिल्डरों को अप्रत्यक्ष लाभ: बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि S+4 पॉलिसी पर रोक लगने से उन बड़े बिल्डरों को फायदा होगा जिनके बहुमंजिला फ्लैट्स (Apartments) की बिक्री धीमी हो गई थी। जब स्वतंत्र फ्लोर्स का विकल्प सीमित होगा, तो खरीदार मजबूरन बड़े ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स और ऊंची इमारतों में फ्लैट खरीदने की ओर रुख करेंगे।
इन्वेंटरी क्लियरेंस: बड़े बिल्डरों के पास पहले से तैयार स्टॉक (Ready-to-move flats) को निकालने का यह एक सुनहरा अवसर हो सकता है, क्योंकि बाजार में इंडिपेंडेंट फ्लोर्स की नई सप्लाई फिलहाल रुक जाएगी।
अराजक निर्माण पर अंकुश की कोशिश
वरिष्ठ अधिवक्ता निवेदिता शर्मा ने कोर्ट में दलील दी कि बिना क्षमता आकलन के अतिरिक्त मंजिलों की अनुमति देना शहर में अराजकता को बढ़ावा देना है। 2 जुलाई 2024 को जारी अधिसूचना के तहत सरकार ने चौथी मंजिल को मंजूरी दी थी, जिसे अब कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
आगे क्या? अब सभी की नजरें 8 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी हैं। यदि यह रोक लंबी खिंचती है, तो हरियाणा के शहरी इलाकों में रिहायशी प्लॉट की कीमतों और फ्लैट्स की डिमांड पर इसका गहरा असर देखने को मिलेगा।