Private School नए दाखिले के नाम पर वसूले “हिडन चार्जेस” तो नपेंगे स्कूल, शिक्षा निदेशालय का सीधा अल्टीमेटम

Private School Admission : हरियाणा के शिक्षा जगत में नए सत्र की सुगबुगाहट के बीच माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के तमाम निजी स्कूलों को एक बेहद सख्त और अंतिम चेतावनी जारी कर दी है। निदेशालय ने साफ कर दिया है कि नए एडमिशन के नाम पर यदि किसी भी स्कूल ने ‘हिडन चार्जेस’ या गुप्त शुल्कों के जरिए अभिभावकों की जेब पर डाका डालने की कोशिश की, तो उनके खिलाफ ऐसी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी कि वे दोबारा नियम तोड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाएंगे। विभाग के संज्ञान में आया है कि कई स्कूल दाखिले के वक्त ट्यूशन फीस के अलावा विकास शुल्क, विविध व्यय और अन्य अज्ञात मदों में अनाप-शनाप राशि वसूल रहे हैं, जिसे अब पूरी तरह से अवैध घोषित कर दिया गया है।
निदेशालय द्वारा जारी इस कड़े फरमान के अनुसार अब स्कूलों को अपनी फीस के एक-एक पैसे का हिसाब सत्र शुरू होने से पहले ही सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा और बीच सत्र में किसी भी तरह का नया या गुप्त शुल्क थोपना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन माना जाएगा। अक्सर देखा गया है कि एडमिशन के समय स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को अंधेरे में रखकर मोटी रकम वसूलते हैं, लेकिन अब स्कूलों को अनिवार्य और वैकल्पिक शुल्कों के बीच एक स्पष्ट लक्ष्मण रेखा खींचनी होगी। स्कूल प्रशासन अब प्रवेश शुल्क और ट्यूशन फीस जैसे बुनियादी घटकों के अलावा किसी भी अन्य सुविधा के लिए छात्रों या उनके परिजनों को बाध्य नहीं कर पाएगा।
परिवहन, हॉस्टल, मेस और अन्य अतिरिक्त गतिविधियों के नाम पर वसूली जाने वाली भारी-भरकम राशि को अब पूरी तरह से वैकल्पिक श्रेणी में रखा गया है, जिसका सीधा अर्थ है कि यदि कोई अभिभावक स्कूल की बस सेवा या कैंटीन का उपयोग नहीं करना चाहता, तो स्कूल प्रबंधन उससे इन मदों में एक धेला भी नहीं मांग सकता। शिक्षा विभाग ने इस बार पारदर्शिता को लेकर अपनी नीति में कोई ढील नहीं दी है और स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपनी आधिकारिक वेबसाइट और मुख्य नोटिस बोर्ड पर पूरी फीस संरचना को पारदर्शी तरीके से प्रदर्शित करें। यदि जांच के दौरान किसी स्कूल की फीस रसीद और घोषित स्ट्रक्चर में रत्ती भर भी अंतर पाया गया या एडमिशन के समय ‘अंडर द टेबल’ वसूली की शिकायत मिली, तो विभाग बिना किसी देरी के उस स्कूल की मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर देगा।
शिक्षा निदेशालय का यह कड़ा रुख उन मुनाफाखोर स्कूलों के लिए एक बड़ा सबक है जो शिक्षा को पूरी तरह से व्यापार बना चुके हैं और नए दाखिलों के सीजन का फायदा उठाकर आम जनता की कमर तोड़ रहे हैं। विभाग ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे किसी भी तरह की मनमानी या अवैध वसूली की शिकायत तुरंत संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में दर्ज कराएं ताकि ऐसे संस्थानों पर नकेल कसी जा सके।