Prince Murder Case – निर्दोष को फंसाने के आरोप में 4 पुलिसकर्मियों को मिली अग्रिम ज़मानत, CBI कोर्ट में अगली सुनवाई 7 अगस्त को
सीबीआई की विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान सेवानिवृत्त डीएसपी बीरम सिंह, डीएसपी नरेंद्र खटाना, सेवानिवृत्त निरीक्षक शमशेर सिंह और ईएसआई (ESI) सुभाष चंद अदालत में मौजूद रहे।

Prince Murder Case : साल 2017 के बहुचर्चित प्रिंस हत्याकांड मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। इस केस में गलत जांच कर एक निर्दोष को फंसाने के आरोप में फंसे सेवानिवृत्त डीएसपी समेत चार पुलिसकर्मियों पर अब मुकदमा चलेगा। पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए ये निर्देश दिए हैं।
मंगलवार को सीबीआई की विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान सेवानिवृत्त डीएसपी बीरेम सिंह, डीएसपी नरेंद्र खटाना, सेवानिवृत्त निरीक्षक शमशेर सिंह और ईएसआई (ESI) सुभाष चंद अदालत में मौजूद रहे। चारों पुलिसकर्मियों ने कोर्ट में अग्रिम ज़मानत याचिका लगाई थी, जिसे CBI की विशेष अदालत ने स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने चारों को एक-एक लाख रुपये के बांड पर अग्रिम ज़मानत दे दी है।

ज़मानत देते हुए कोर्ट ने इन चारों पर देश छोड़कर जाने पर रोक लगा दी है; यदि वे देश से बाहर जाना चाहते हैं, तो उन्हें अदालत से अनुमति लेनी होगी। इस मामले में अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी।
यह मामला उस समय और गरमा गया जब सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा मुकदमा चलाने के निर्देश देने के बाद, 13 जून की शाम को ही हरियाणा सरकार के गृह विभाग से भी चारों पुलिसकर्मियों पर मामला चलाने की अनुमति मिल गई। मंगलवार को कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान इस अनुमति को रिकॉर्ड में रखा गया और पीड़ित पक्ष को इसकी जानकारी दी गई।

मंगलवार को कोर्ट में इन चारों पुलिसकर्मियों पर आरोप तय होने थे, लेकिन आरोपी पक्ष ने सीबीआई की चार्जशीट का अध्ययन करने के लिए समय मांगा। इसी वजह से अब आरोप तय करने की प्रक्रिया अगली सुनवाई, यानी 7 अगस्त तक टाल दी गई है।
CBI कोर्ट ने 13 जून 2025 को लापरवाही से जांच के इस मामले में इन चार पुलिसकर्मियों पर आरोप तय करने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने चारों पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाते हुए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 166ए (लोक सेवक द्वारा कानून की अवज्ञा), 167 (चोट पहुँचाने के इरादे से गलत दस्तावेज़ बनाना), 194 (मौत की सज़ा दिलाने के इरादे से झूठे सबूत गढ़ना), 330 (जबरन स्वीकारोक्ति के लिए चोट पहुँचाना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला चलाने के निर्देश दिए थे।
मामला साल 2017 सितंबर का है, जब भोंडसी स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ने वाले आठ वर्षीय प्रिंस की कक्षा के बाथरूम में गला रेतकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। हत्या के तुरंत बाद, गुरुग्राम पुलिस ने जांच करते हुए हत्या वाले दिन देर रात स्कूल के बस कंडक्टर अशोक कुमार को आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार कर लिया था।
अशोक कुमार के परिजनों और प्रिंस के परिजनों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इस हत्याकांड के बाद स्कूल के बाहर भारी हंगामा भी हुआ था। तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रिंस के माता-पिता से मुलाकात की थी और उनकी मांग पर इस मामले की सीबीआई जांच करवाने के आदेश दिए थे।


सीबीआई ने इस मामले की जांच करते हुए बस कंडक्टर अशोक कुमार को क्लीन चिट दे दी थी। सीबीआई की जांच में स्कूल में पढ़ने वाले 12वीं कक्षा के एक नाबालिग छात्र (जिसे भोलू नाम से जाना गया) को असली आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार किया गया था।

सीबीआई ने प्रिंस हत्याकांड में अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट साल 2021 में कोर्ट में पेश की थी। इस चार्जशीट में सीबीआई ने तत्कालीन गुरुग्राम पुलिस में तैनात सेवानिवृत्त डीएसपी/एसीपी सोहना बीरम सिंह, भोंडसी थाना प्रभारी (निरीक्षक) नरेंद्र खटाना, जांच अधिकारी उप-निरीक्षक शमशेर सिंह और ईएसआई सुभाष चंद को आरोपी बनाया था। इसके साथ ही सीबीआई ने हरियाणा सरकार से इन चारों पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अनुमति मांगी थी। हालांकि, सरकार ने तब यह कहते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था कि पुलिसकर्मियों ने जानबूझकर ऐसा नहीं किया था।
बता दें कि इनमें डीएसपी बीरम सिंह और शमशेर सिंह सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि निरीक्षक रहे नरेंद्र खटाना को पदोन्नति देकर डीएसपी बना दिया गया है। इस मामले में अब पुलिसकर्मियों पर मुकदमा चलने से न्याय की उम्मीदें एक बार फिर जगी हैं।










