Portable Toilet क्यों साथ लेकर चलते हैं व्लादिमीर पुतिन? रूसी राष्ट्रपति की निजी सुरक्षा का अभूतपूर्व प्रोटोकॉल

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 4 और 5 दिसंबर के प्रस्तावित दिल्ली दौरे से पहले सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम

Portable Toilet 🚽 ‘सीक्रेट कवर’ में ‘पोर्टेबल टॉयलेट डिप्लोमेसी’: जानें क्यों पुतिन अपने साथ लाते हैं खास शौचालय ?

 

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 4 और 5 दिसंबर को प्रस्तावित दिल्ली दौरे को लेकर भारतीय सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। यह दौरा न सिर्फ भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि राष्ट्रपति की निजी सुरक्षा और प्रोटोकॉल ने भी मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस बार चर्चा का मुख्य केंद्र है – व्लादिमीर पुतिन द्वारा अपने साथ लाया जाने वाला खास पोर्टेबल टॉयलेट (Portable Toilet)।

⚠️ ‘सीक्रेट कवर’ के पीछे का सुरक्षा रहस्य

पुतिन के दौरे से पहले ही रूस की अग्रिम सुरक्षा टीम (एडवांस टीम) के 50 से अधिक अफसर भारत पहुँच चुके हैं, जो पुतिन के आगमन की सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करने में जुटे हैं। इस टीम में एफएसओ (फेडरल प्रोटेक्शन सर्विस), रूसी खुफिया एजेंसी एफएसबी (FSB) और आरडीआई (रूसी रक्षा खुफिया) के कमांडो शामिल हैं।

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पुतिन की सुरक्षा का यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसे ‘सीक्रेट कवर’ कहा जाता है। इसमें उनके ठहरने वाले होटल में AI मॉनिटरिंग और रूट सैनिटाइजेशन से लेकर 24×7 सुरक्षा निगरानी शामिल है। यहाँ तक कि पुतिन के उपयोग के लिए खास तौर पर 100 से अधिक अधिकारी भी तैनात रहेंगे, जो हर पल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।

🚽 पोर्टेबल टॉयलेट: निजी सुरक्षा का अंतिम घेरा

पुतिन की निजी सुरक्षा प्रोटोकॉल में सबसे अभूतपूर्व कदम उनके द्वारा अपने साथ लाया जाने वाला पोर्टेबल टॉयलेट है।

अखबारों और अंतरराष्ट्रीय खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हमेशा अपने विदेश दौरों पर एक विशेष पोर्टेबल टॉयलेट साथ लेकर चलते हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य है अंतरराष्ट्रीय जासूसी और बायो-डेटा चोरी से बचाव करना।

क्यों लाते हैं पोर्टेबल टॉयलेट?

  1. बायो-डेटा सुरक्षा: पुतिन की सिक्योरिटी टीम का मानना है कि उनका शारीरिक अपशिष्ट (Body Waste) किसी भी विदेशी खुफिया एजेंसी के हाथ नहीं लगना चाहिए। यह अपशिष्ट डीएनए (DNA) या अन्य महत्वपूर्ण बायो-डेटा का स्रोत हो सकता है, जिसका उपयोग जासूसी या स्वास्थ्य निगरानी के लिए किया जा सकता है।

  2. ज़हर/टॉक्सिन परीक्षण से बचाव: कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि खुफिया एजेंसियों द्वारा अपशिष्ट में ज़हर या किसी अन्य टॉक्सिन की मौजूदगी की जाँच करके राष्ट्रपति के स्वास्थ्य और आहार के बारे में गोपनीय जानकारी निकाली जा सकती है। पोर्टेबल टॉयलेट का इस्तेमाल करके उनके अपशिष्ट को तुरंत एक सीलबंद कंटेनर में सुरक्षित रूस वापस ले जाया जाता है।

  3. अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल: यह एक विशिष्ट ‘प्रेसिडेंशियल सीक्रेट प्रोटोकॉल’ है जो दुनिया के कुछ ही राष्ट्राध्यक्ष अपनाते हैं, खासकर वे जो लंबी अवधि से सत्ता में हैं और जिनकी सुरक्षा को उच्च-स्तरीय खतरा माना जाता है।

सुरक्षा अधिकारियों का तर्क है कि यदि अपशिष्ट में कोई संदिग्ध पदार्थ पाया जाता है, तो यह संकेत दे सकता है कि उन्हें किसी दौरे पर धीमी गति से ज़हर दिया गया है या उनके स्वास्थ्य को खतरा है। इसलिए, राष्ट्रपति की निजी सुरक्षा के लिए टॉयलेट और उसके इस्तेमाल की जगह का पूर्ण रूप से सैनिटाइज्ड और निजी होना आवश्यक है।

व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान, उनकी यह अनूठी सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में है, जो बताती है कि एक राष्ट्राध्यक्ष की सुरक्षा कितनी अभेद्य और जटिल हो सकती है।

Manu Mehta

मनु मेहता पिछले लगभग 18 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों (ANI News, News Express, TV 9,… More »
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