फाइलों में उलझी PNG Pipeline, Dwarka Expressway के 6500 परिवारों पर मंडरा रहा खतरा
गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) के बीच अनुमति को लेकर चल रही खींचतान का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। करीब 6,474 फ्लैटों के निवासियों ने एचसीजीएल के साथ सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं

Dwarka Expressway के सेक्टर 102 और 102-ए में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए ‘स्मार्ट सिटी’ का सपना अधूरा साबित हो रहा है। बुनियादी सुविधा मानी जाने वाली पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) पिछले दो वर्षों से प्रशासनिक तालमेल की कमी के कारण अधर में लटकी है। हालत यह है कि सोसाइटियों के अंदर पाइपलाइन का जाल तो बिछ चुका है, लेकिन मुख्य लाइन से जुड़ाव न होने PNG के कारण चूल्हे आज भी एलपीजी सिलेंडरों के भरोसे हैं।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि हरियाणा सिटी गैस लिमिटेड (HCGL) और गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) के बीच अनुमति को लेकर चल रही खींचतान का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। करीब 6,474 फ्लैटों के निवासियों ने एचसीजीएल के साथ सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं, लेकिन जीएमडीए की ओर से मुख्य पाइपलाइन बिछाने की क्लीयरेंस न मिलने के कारण प्रोजेक्ट ठप पड़ा है।
सुरक्षा का खतरा: 20वीं और 25वीं मंजिल तक भारी एलपीजी सिलेंडर ले जाना न केवल श्रमसाध्य है, बल्कि लिफ्ट और गलियारों में सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक है।
तैयारी पूरी, फिर भी इंतजार: सोसाइटियों के भीतर ‘स्टैक’ लग चुके हैं, लेकिन मीटर और कनेक्शन का काम रुका हुआ है।
दो साल की देरी: नियम और शुल्क जमा करने के बावजूद नागरिक बुनियादी हक के लिए भटक रहे हैं।
सेक्टर 102 की हाईराइज सोसाइटियों के लोगों ने जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पी.सी. मीणा को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। निवासियों का कहना है कि पीएनजी अब कोई लग्जरी नहीं, बल्कि शहरी जीवन की आवश्यकता है। प्रशासनिक उदासीनता के कारण लोग महंगे और असुरक्षित विकल्पों पर निर्भर हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एचसीजीएल के वरिष्ठ अधिकारी एके जाना ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने बताया कि जीएमडीए के साथ मुख्य लाइन को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है और समन्वय स्थापित कर लिया गया है। प्रशासन का दावा है कि अगले 3 से 4 सप्ताह के भीतर द्वारका एक्सप्रेसवे की इन सोसाइटियों में पीएनजी कनेक्शन देने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।