Murder परदेस में बुझ गया घर का चिराग: पेट पालने गुरुग्राम आया था 17 साल का केशव, चाकू गोदकर की हत्या
Murder महज 3 हजार रुपए के विवाद ने ली मासूम की जान; जिस उम्र में खेलना था, उस उम्र में अपनों के लिए कमा रहा था 'लाल'

Murder : कहते हैं कि गरीबी और जिम्मेदारियां इंसान को वक्त से पहले बड़ा बना देती हैं। पलवल के गांव बड़ा बैजपुर का रहने वाला 17 वर्षीय केशव भी इसी उम्मीद के साथ गुरुग्राम आया था कि वह अपने परिवार के दुखों को कम कर सके और घर का गुजारा चला सके। लेकिन उसे क्या पता था कि जिस शहर को वह अपनी मेहनत और सपनों का जरिया मान रहा है, वही शहर उसकी जान का दुश्मन बन जाएगा।
घर की उम्मीदों का था सहारा केशव अभी नाबालिग था, उसकी उम्र खेलने-पढ़ने की थी, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ने उसे कच्ची उम्र में ही काम करने पर मजबूर कर दिया। वह गुरुग्राम के सुखराली में एक किराए के कमरे में रहकर सेक्टर-14 स्थित एक कार शोरूम में मेहनत करता था। हर महीने की तनख्वाह से वह अपने गांव पैसे भेजता था ताकि घर का चूल्हा जल सके, लेकिन अब उस घर में मातम का सन्नाटा पसरा है।
दोस्ती निभाने की मिली खौफनाक सजा विवाद की जड़ मात्र 3,000 रुपये का लेन-देन था। केशव के दोस्त धीरज ने आरोपी मानू से यह पैसे उधार लिए थे। जब मानू पैसों के लिए धीरज पर दबाव बनाने लगा, तो केशव ने दोस्ती का फर्ज निभाते हुए बीच-बचाव किया और मानू को दबाव न बनाने की बात कही। बस यही बात आरोपी को इतनी नागवार गुजरी कि उसने इस मासूम की जान लेने की ठान ली। मंगलवार सुबह फोन पर हुई कहासुनी के बाद जब केशव आरोपी के पास पहुँचा, तो मानू ने उस पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिए।

घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस हरकत में आई। घायल केशव को तुरंत फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार ने बताया, “मृतक के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है और उनकी शिकायत के आधार पर हत्या की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया जा रहा है। मुख्य आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है और उससे गहन पूछताछ की जा रही है। मामले की आगामी कार्रवाई नियमानुसार अमल में लाई जा रही है।”

आज उस मां की गोद सूनी हो गई है जिसका लाल अपनों की खातिर परदेस गया था। आरोपी भले ही पुलिस की गिरफ्त में है, लेकिन क्या वो 3,000 रुपये उस अनमोल जान से बड़े थे? पूरा गांव आज उस मेहनती किशोर की याद में आंसू बहा रहा है।