Gurugram में 3 लाख से कम मासिक आय वालों के लिए नो एंट्री: एक्सपर्ट्स ने बताया क्यों यहां घर खरीदना बना एक अधूरा सपना
रियल एस्टेट विशेषज्ञ के अनुसार, साल 2025 में गुरुग्राम के भीतर एक सम्मानजनक घर खरीदने के लिए केवल अच्छी सैलरी ही काफी नहीं है। उनके विश्लेषण के अनुसार, एक सफल खरीदार की प्रोफाइल कुछ ऐसी होनी चाहिए:

Gurugram : क्या आप गुरुग्राम में घर खरीदने का सपना देख रहे हैं? अगर आपके परिवार की कुल मासिक आय ₹2.5 से ₹3 लाख के बीच नहीं है, तो रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, आप इस दौड़ से लगभग बाहर हो चुके हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक रियल एस्टेट सलाहकार की रिपोर्ट और बाजार के आंकड़ों ने गुरुग्राम में ‘अफोर्डेबिलिटी’ (किफायतीपन) के दावों की पोल खोल दी है।
डबल इनकम और करोड़ों की बचत ही एकमात्र रास्ता
रियल एस्टेट विशेषज्ञ के अनुसार, साल 2025 में गुरुग्राम के भीतर एक सम्मानजनक घर खरीदने के लिए केवल अच्छी सैलरी ही काफी नहीं है। उनके विश्लेषण के अनुसार, एक सफल खरीदार की प्रोफाइल कुछ ऐसी होनी चाहिए:
पारिवारिक आय: पति-पत्नी दोनों कमाऊ हों और कुल आय ₹3 लाख से अधिक हो।
तगड़ी बचत: घर की बुकिंग और डाउन पेमेंट के लिए कम से कम ₹80 लाख से ₹1 करोड़ की नकदी हाथ में हो।
कर्ज लेने की क्षमता: ₹3 करोड़ से ₹5 करोड़ तक का होम लोन चुकाने का सामर्थ्य।
बाजार में मंदी की चर्चाओं के बावजूद गुरुग्राम में कीमतें आसमान छू रही हैं। विशेषज्ञों ने इसके तीन प्रमुख कारण बताए हैं:

लग्जरी की भूख: डेवलपर्स अब छोटे फ्लैट्स के बजाय 5 करोड़ से ऊपर की ‘प्रीमियम इन्वेंट्री’ पर ध्यान दे रहे हैं। द्वारका एक्सप्रेसवे और गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन जैसे इलाकों में 91% बिक्री लग्जरी सेगमेंट में हो रही है।
इनकम का केंद्रीकरण: शहर में खरीदार मुख्य रूप से स्टार्टअप फाउंडर्स, सीएक्सओ (CXOs) और एनआरआई (NRIs) हैं। इनकी भारी क्रय शक्ति (Purchasing Power) के कारण कीमतें स्थिर बनी रहती हैं।
सप्लाई की कमी: मुख्य शहर के क्षेत्रों में नई जमीन खत्म हो रही है, जिससे ‘रीसेल’ मार्केट भी गर्म है।
मध्यम वर्ग के लिए अब ‘सोहना’ ही आखिरी उम्मीद?
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि जिनका बजट ₹1 से ₹1.5 करोड़ के बीच है, उनके लिए मुख्य गुरुग्राम में अब कोई जगह नहीं बची है। ऐसे खरीदारों को अब ‘न्यू गुरुग्राम’ के सुदूर सेक्टरों या सोहना रोड की ओर रुख करना पड़ रहा है।

“गुरुग्राम अब भारत का कोई औसत शहर नहीं रहा। यह अब एक ऐसा मार्केट बन चुका है जो ‘नीड’ (जरूरत) पर नहीं, बल्कि ‘इनकम कंसंट्रेशन’ (पूंजी के जमाव) पर चलता है। अगर आपके पास बैकअप के तौर पर पुश्तैनी जायदाद या करोड़ों की सेविंग्स नहीं है, तो सिर्फ सैलरी के दम पर यहाँ घर लेना अब लगभग नामुमकिन है।” – रियल एस्टेट एक्सपर्ट
आंकड़े बताते हैं कि गुरुग्राम के कुछ पॉश इलाकों में पिछले 10 साल में निवेश पर 16.2% का सालाना रिटर्न मिला है। जो घर 2015 में ₹50 लाख का था, उसकी कीमत आज ₹2.25 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। यही वजह है कि निवेशक इसे ‘सोना उगलने वाली जमीन’ मान रहे हैं, लेकिन रहने के लिए घर तलाश रहे आम आदमी के लिए यह शहर एक महंगा सौदा साबित हो रहा है।












