गुरुग्राम में 4.2 किमी का नया ‘हवाई रास्ता’ (Elevated Road) तय, 22 अप्रैल को तय होगा कौन बनाएगा इसे?
जीएमडीए ने तैयार किया 755 करोड़ का मास्टर प्लान, पूरी डिटेल यहाँ देखें।

Elevated Road : साइबर सिटी के निवासियों के लिए आने वाले दिन सफर को आसान बनाने वाले साबित होंगे। शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली सदर्न पेरिफेरल रोड (SPR) की सूरत जल्द ही बदलने वाली है। गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) ने वाटिका चौक से लेकर एनएच-48 (दिल्ली-जयपुर हाईवे) तक 4.2 किलोमीटर लंबे सिग्नल-फ्री एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण की तैयारी पूरी कर ली है। इस प्रोजेक्ट का टेंडर आगामी 22 अप्रैल को खोला जाएगा।
जाम का ‘परमानेंट’ समाधान: 755 करोड़ का मास्टर प्लान
करीब 755 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह कॉरिडोर शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में ट्रैफिक का दबाव कम करेगा। वर्तमान में द्वारका एक्सप्रेसवे या जयपुर की ओर से आने वाले वाहनों को राजीव चौक या सुभाष चौक के जाम से जूझना पड़ता है। इस कॉरिडोर के बनने के बाद वाहन सीधे बिना किसी रेड लाइट के मंजिल तक पहुंच सकेंगे।
प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं:
लंबाई: 4.2 किलोमीटर (वाटिका चौक से NH-48 तक)।
लेन: 4-लेन का मुख्य एलिवेटेड कॉरिडोर।
सर्विस रोड: नीचे 3-3 लेन की मुख्य सर्विस रोड और 2-2 लेन की सेकेंडरी सर्विस लेन होगी।
रैंप: प्रमुख जंक्शनों पर वाहनों के चढ़ने और उतरने के लिए दो-लेन के अप-डाउन रैंप।
इंटरचेंज: वाटिका चौक पर एक भव्य इंटरचेंज भी बनाया जाएगा, जो इस प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा है।
इन इलाकों को होगा सीधा फायदा
यह कॉरिडोर बनने से एसपीआर के साथ-साथ सोहना रोड, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड और नए गुरुग्राम के सेक्टरों में रहने वाले लाखों लोगों को फायदा होगा। यह द्वारका एक्सप्रेसवे, एनएच-48 और गुरुग्राम-सोहना एलिवेटेड रोड के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करेगा।
“सिग्नल-फ्री एलिवेटेड कॉरिडोर की टेंडर प्रक्रिया इसी महीने पूरी कर ली जाएगी। इसके साथ वाटिका चौक पर इंटरचेंज बनाने की तैयारी भी चल रही है। यह परियोजना एसपीआर कॉरिडोर के साथ तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों की भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इससे शहर के मुख्य चौराहों और आंतरिक सड़कों पर भी ट्रैफिक दबाव घटाने में मदद मिलेगी।” — पी.सी. मीणा, सीईओ, जीएमडीए (GMDA)
ढाई साल का इंतजार, फिर रफ्तार
जीएमडीए अधिकारियों के मुताबिक, वर्क अलॉट होने के बाद इस प्रोजेक्ट को 2.5 साल (30 महीने) के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली कमेटी से मंजूरी मिलते ही जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया जाएगा। यह विकास न केवल गुरुग्राम की सड़कों पर वाहनों की रफ्तार बढ़ाएगा, बल्कि दिल्ली-एनसीआर की कनेक्टिविटी को भी एक नए स्तर पर ले जाएगा।