Mahira Group मनी लॉन्ड्रिंग केस : कोर्ट का बड़ा फैसला, प्रमोटर सिकंदर सिंह की याचिका खारिज
हजारों घर खरीदारों की धोखाधड़ी और विदेश भागने की आशंका के बीच अदालत ने नहीं दी अनुमति

Mahira Group मनी लॉन्ड्रिंग केस में गुरुग्राम की विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत ने महिरा ग्रुप के प्रमोटर सिकंदर सिंह को एक बड़ा झटका दिया है। मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे सिंह ने परिवार के साथ पेरिस, लंदन और दुबई में छुट्टियां बिताने के लिए अदालत से अपना पासपोर्ट वापस मांगा था, जिसे अदालत ने सुरक्षा और न्याय के हितों को देखते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया।

सिकंदर सिंह ने अदालत में आवेदन देकर 2 मार्च से 15 मार्च तक परिवार के साथ छुट्टियां मनाने के लिए पेरिस, लंदन और दुबई जाने की अनुमति मांगी थी। माहिरा ग्रुप के प्रमोटर सिकंदर सिंह ने अदालत में दायर याचिका में कहा था कि वह पहले से जमानत पर हैं। उन्होंने अदालत द्वारा लगाई गई सभी शर्तों का पालन किया है। हाईकोर्ट से 31 जनवरी 2025 को नियमित जमानत मिलने के बाद उन्होंने अपना पासपोर्ट अदालत में जमा करा दिया था। हर सुनवाई पर नियमित रूप से पेश हो रहे हैं।
याचिका में यह भी कहा गया था कि प्रस्तावित यात्रा केवल पारिवारिक अवकाश के लिए है। वह विदेश में किसी भी तरह की गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया था कि लौटने के 24 घंटे के भीतर पासपोर्ट फिर से अदालत में जमा करा देंगे। अदालत की अगली तारीख पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे।
वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से इस आवेदन का कड़ा विरोध किया गया। ईडी के विशेष लोक अभियोजक ने अदालत को बताया कि सिकंदर सिंह पहले भी देश छोड़ने की कोशिश कर चुके हैं। सिकंदर सिंह लुकआउट सर्कुलर के कारण एयरपोर्ट पर रोके गए थे। ऐसे में विदेश जाने की अनुमति देने से उनके वापस न लौटने का खतरा बना रहेगा। एजेंसी ने यह भी कहा कि आरोपित महिरा ग्रुप की कंपनियों के जरिए हजारों होमबायर्स से धोखाधड़ी और मनी लान्ड्रिंग के गंभीर आरोपों का सामना कर रहा है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि यद्यपि विदेश यात्रा करना व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है। लेकिन प्रत्येक मामले में परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेना जरूरी होता है। अदालत ने माना कि मामले में बड़ी संख्या में होमबायर्स से कथित धोखाधड़ी, मनी लान्ड्रिंग के गंभीर आरोप और पहले देश छोड़ने की कोशिश से जुड़ी आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी कहा कि आरोपित ने विदेश यात्रा के लिए कोई अत्यावश्यक या अपरिहार्य कारण नहीं बताया है। प्रस्तावित यात्रा केवल अवकाश के उद्देश्य से है। इन परिस्थितियों में अदालत ने विदेश यात्रा की अनुमति देने से इनकार करते हुए पासपोर्ट जारी करने की मांग भी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि भविष्य में किसी वास्तविक आवश्यकता पर आरोपित नया आवेदन दे सकता है।