Iran War Impact : ईरान युद्ध की चपेट में गुरुग्राम, तारकोल की किल्लत से थमा विकास का पहिया

100 किलोमीटर लंबी मॉडल रोड परियोजना अधर में, मानसून से पहले सड़कों के 'कायाकल्प' पर लगा ब्रेक

Iran War Impact : पश्चिम एशिया (Middle East) में ईरान और इज़राइल के बीच गहराते युद्ध के बादलों ने सात समंदर पार भारत की ‘साइबर सिटी’ गुरुग्राम की रफ़्तार पर ब्रेक लगा दिया है। खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) चरमरा गई है, जिसका सीधा असर सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले तारकोल (बिटुमिन) की उपलब्धता पर पड़ा है। गुरुग्राम में न केवल नई सड़कों का निर्माण रुक गया है, बल्कि मानसून से पहले होने वाली मरम्मत का काम भी पूरी तरह ठप पड़ गया है।


मॉडल रोड प्रोजेक्ट पर ‘संकट के बादल’

शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बनाई गई 100 किलोमीटर लंबी मॉडल रोड परियोजना इस वैश्विक तनाव की सबसे बड़ी शिकार बनी है। नगर निगम की योजना थी कि इन सड़कों को आधुनिक मानकों के आधार पर तैयार किया जाएगा, लेकिन तारकोल की भारी कमी और बढ़ती कीमतों ने ठेकेदारों के हाथ बांध दिए हैं।


75 करोड़ के टेंडर, फिर भी काम ‘जीरो’

नगर निगम गुरुग्राम (MCG) ने हाल ही में करीब 75 करोड़ रुपये के सड़क निर्माण और मरम्मत के टेंडर जारी किए थे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद एजेंसियां साइट पर काम शुरू नहीं कर पा रही हैं।

मुख्य बाधाएं:

  • कीमतों में उछाल: पिछले दो हफ्तों में तारकोल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है।

  • सप्लाई में कमी: हॉट मिक्स प्लांट चलाने के लिए आवश्यक मात्रा में बिटुमिन नहीं मिल रहा है।

  • श्रमिकों की बेकारी: काम रुकने से निर्माण साइटों पर तैनात श्रमिक खाली बैठे हैं, जिससे लागत बढ़ती जा रही है।


मानसून में बढ़ेगी शहर की ‘सड़क-पीड़ा’

नगर निगम के अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती मानसून है। जून के अंत तक प्रमुख सड़कों और सेक्टरों की अंदरूनी सड़कों की मरम्मत का लक्ष्य रखा गया था। यदि समय रहते तारकोल की आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो अधूरी खुदी हुई सड़कें बारिश के मौसम में जलभराव और भारी कीचड़ का कारण बनेंगी। इससे न केवल यातायात बाधित होगा, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी कई गुना बढ़ जाएगा।

“ग्लोबल सप्लाई चेन टूटने से बिटुमिन की कीमतों में अनिश्चितता है। ठेकेदार मौजूदा रेट पर काम करने से कतरा रहे हैं क्योंकि उन्हें भारी घाटा होने का डर है। यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो शहर के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंच सकता है।”शहरी बुनियादी ढांचा विशेषज्ञ


धूल और प्रदूषण की दोहरी मार

काम रुकने का एक और गंभीर पहलू वायु प्रदूषण है। सड़कों के निर्माण के लिए की गई खुदाई के कारण उड़ने वाली धूल शहर की एयर क्वालिटी (AQI) को बिगाड़ रही है। बिना तारकोल की कोटिंग के, ये सड़कें आने वाले दिनों में गुरुग्राम के निवासियों के लिए ‘धूल का गुबार’ बन सकती हैं।

अब सबकी नज़रें केंद्र सरकार और तेल कंपनियों पर हैं कि वे इस संकट का क्या वैकल्पिक समाधान निकालती हैं, ताकि साइबर सिटी की सड़कों को इस ‘वैश्विक युद्ध’ की भेंट चढ़ने से बचाया जा सके।

Manu Mehta

मनु मेहता पिछले लगभग 18 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों (ANI News, News Express, TV 9,… More »
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