Kundli (कुंडली) में अशुभ ग्रहों के कारण होने वाली बीमारियाँ और उनके सरल उपाय
कुंडली में अगर निम्न ग्रह अशुभ है तो निम्न बीमारी देंगे अपनी महादशा या अंतर दशा में

Kundli में अशुभ ग्रहों के उपाय
महादशा/अंतरदशा में ग्रह जनित स्वास्थ्य समस्याओं से मुक्ति
भारतीय ज्योतिष के अनुसार, जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति व्यक्ति के जीवन, भाग्य और स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित करती है। जब कोई ग्रह अपनी महादशा (मुख्य अवधि) या अंतरदशा (उप-अवधि) में अशुभ या कमजोर स्थिति में होता है, तो यह जातक को शारीरिक और मानसिक कष्ट दे सकता है, विशेषकर उन अंगों या प्रणालियों से संबंधित जिन पर उस ग्रह का अधिकार होता है।
☀️ सूर्य (Sun)
अशुभता के कारण संभावित रोग: सूर्य आत्मा, जीवन शक्ति और हृदय का कारक है। अशुभ होने पर यह हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मुँह में बार-बार थूक इकट्ठा होना, झाग निकलना, धड़कन का अनियंत्रित होना, शारीरिक कमजोरी और रक्त चाप, हड्डियों की कमजोरी और बुखार जैसी परेशानियाँ दे सकता है। यह व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी कमजोर करता है।
उपाय:
प्रतिदिन सूर्य देव को अर्घ्य दें (जल चढ़ाएँ) और ‘ॐ ह्रां ह्रीं हौं सः सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें।
रविवार का व्रत रखें या नमक रहित भोजन करें।
पिता और सरकारी अधिकारियों का सम्मान करें।
गेहूँ, गुड़ और तांबे का दान करें।
🌙 चंद्रमा (Moon)
अशुभता के कारण संभावित रोग: चंद्रमा मन, भावनाओं और तरल पदार्थों का प्रतिनिधित्व करता है। अशुभ चंद्रमा मानसिक तनाव, अवसाद, अनिद्रा, फेफड़ों की समस्याएँ, दमा, जल-जनित रोग, दिल और आँख की कमजोरी, रक्त संबंधी विकार और महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितताएँ पैदा कर सकता है। यह शरीर में जल संतुलन को भी बिगाड़ता है।
उपाय:

सोमवार को भगवान शिव की पूजा करें और उन्हें दूध व जल अर्पित करें।
‘ॐ सों सोमाय नमः’ मंत्र का जाप करें।
चांदी के बर्तन में पानी पीना लाभकारी हो सकता है।
माता, बुजुर्ग महिलाओं और जल स्रोतों का सम्मान करें।
दूध, चावल और सफेद वस्त्र का दान करें।
मंगल (Mars)
अशुभता के कारण संभावित रोग: मंगल ऊर्जा, साहस और रक्त का कारक है। यह अशुभ होने पर उच्च रक्तचाप, दुर्घटनाएँ, चोट, घाव, सर्जरी की आवश्यकता, फोड़े-फुंसी, अत्यधिक क्रोध, बवासीर, रक्त और पेट संबंधी बीमारी, नासूर, जिगर, पित्त आमाशय, भगंदर और फोड़े होनाऔर मांसपेशियों से संबंधित रोग दे सकता है।
उपाय:
प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें और मंगलवार का व्रत रखें।
‘ॐ अं अंगारकाय नमः’ मंत्र का जाप करें।
गुड़, मसूर की दाल और तांबे का दान करें।
छोटे भाई-बहनों और सेना/पुलिस कर्मियों का सम्मान करें।
मीठी चीजें दान करें और क्रोध पर नियंत्रण रखें।
बुध (Mercury)
अशुभता के कारण संभावित रोग: बुध बुद्धि, वाणी और तंत्रिका तंत्र का प्रतिनिधित्व करता है। यह अशुभ होने पर त्वचा रोग, तंत्रिका तंत्र संबंधी विकार, वाणी दोष (हकलाना), याददाश्त की कमजोरी, चेचक, नाड़ियों की कमजोरी, जीभ और दाँत का रोग, एलर्जी और गले संबंधी समस्याएँ दे सकता है। यह निर्णय लेने की क्षमता को भी प्रभावित करता है।
उपाय:
बुधवार को गाय को हरी घास या पालक खिलाएँ।
‘ॐ बुं बुधाय नमः’ मंत्र का जाप करें।
पन्ना धारण करने से पहले ज्योतिषी से सलाह लें।
छोटी कन्याओं और बहनों का सम्मान करें।
साबुत मूँग और हरी सब्जियों का दान करें।
Jupiter (गुरु)
अशुभता के कारण संभावित रोग: गुरु ज्ञान, यकृत (Liver) और वसा का कारक है। अशुभ गुरु यकृत रोग, मोटापा, पेट की गैस और फेफड़े की बीमारियाँ, पाचन तंत्र की गड़बड़ी, मधुमेह (Diabetes), थायरॉइड की समस्याएँ और पीलिया जैसी बीमारियाँ दे सकता है। यह निराशा और धन की कमी भी लाता है।
उपाय:
बृहस्पतिवार को भगवान विष्णु की पूजा करें और केले के पेड़ की पूजा करें।
‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः’ मंत्र का जाप करें।
गुरुजनों, शिक्षकों और बड़ों का सम्मान करें।
केला, चने की दाल और पीले वस्त्र का दान करें।
माथे पर केसर का तिलक लगाएँ।
शुक्र (Venus)
अशुभता के कारण संभावित रोग: शुक्र प्रेम, सौंदर्य और प्रजनन अंगों का कारक है। अशुभ होने पर यह चा, दाद, खुजली का रोग, यौन रोग, मूत्र पथ के संक्रमण, हार्मोनल असंतुलन, गुर्दे की समस्याएँ, चेहरे की चमक में कमी और शुक्राणु/अंडाणु से संबंधित समस्याएँ दे सकता है।
उपाय:
शुक्रवार को देवी लक्ष्मी या माँ दुर्गा की पूजा करें।
‘ॐ शुं शुक्राय नमः’ मंत्र का जाप करें।
जीवनसाथी का सम्मान करें।
सफेद वस्त्र, दही, घी और चावल का दान करें।
इत्र या सुगंधित वस्तुओं का उपयोग करें।
शनि (Saturn)
अशुभता के कारण संभावित रोग: शनि कर्म, दीर्घायु और धीमेपन का कारक है। अशुभ शनि गठिया, हड्डियों और जोड़ों में दर्द, नेत्र रोग और खाँसी की बीमारी, दीर्घकालिक बीमारियाँ, पक्षाघात, दाँत की समस्याएँ, पेट संबंधी रोग और अत्यधिक निराशा एवं आलस्य देता है।
उपाय:
शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
शनि स्तोत्र का पाठ करें या ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करें।
जरूरतमंदों, विकलांगों और श्रमिकों की सहायता करें।
सरसों का तेल, काले तिल, उड़द की दाल और लोहे का दान करें।
राहु (Rahu)
अशुभता के कारण संभावित रोग: राहु रहस्य, भ्रम और अचानक होने वाली घटनाओं का कारक है। यह अशुभ होने पर बुखार, दिमागी की खराबियाँ, अचानक चोट, दुर्घटना, अज्ञात और असाध्य रोग, मानसिक भ्रम, फोबिया, वायरल संक्रमण, कैंसर, नशीले पदार्थों की लत और अचानक गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ दे सकता है।
उपाय:
प्रतिदिन दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
‘ॐ रां राहवे नमः’ मंत्र का जाप करें।
काले-नीले वस्त्रों से बचें।
जौ, सरसों और सप्त अनाज का दान करें।
पक्षियों को दाना डालें।
केतु (Ketu)
अशुभता के कारण संभावित रोग: केतु अलगाव, मोक्ष और सूक्ष्म अंगों का कारक है। यह अशुभ होने पर रीढ़ की हड्डी के रोग, रीढ़, जोड़ों का दर्द, शुगर, कान, स्वप्न दोष, हार्निया, गुप्तांग संबंधी रोग आदि, पैरों में दर्द, गठिया, गुप्त रोग, चर्म रोग और शारीरिक कमजोरी से संबंधित समस्याएँ दे सकता है।
उपाय:
प्रतिदिन गणेश जी की पूजा करें।
‘ॐ कें केतवे नमः’ मंत्र का जाप करें।
कुत्तों को रोटी खिलाएँ (विशेषकर चितकबरे/बहुरंगी)।
तिल, कंबल और लहसुनिया का दान करें।










