‘IIT Baba’ ने बेंगलुरु की इंजीनियर संग रचाई शादी: हिमाचल में लिए सात फेरे, जानें कौन है उनकी हमसफर?
सात फेरों के साथ शुरू हुआ 'ज्ञान के प्रसार' का नया संकल्प; मुंबई से झज्जर तक चर्चा में है 'IIT Baba' की यह अनोखी शादी।

IIT Baba : पिछले साल प्रयागराज महाकुंभ के दौरान अपनी फर्राटेदार अंग्रेजी और आध्यात्मिक ज्ञान से सोशल मीडिया पर ‘IIT बाबा’ के नाम से मशहूर हुए अभय सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। हरियाणा के झज्जर जिले के रहने वाले अभय सिंह ने कर्नाटक की एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर, प्रतिका के साथ विवाह बंधन में बंधकर अपने जीवन की नई पारी की शुरुआत की है।
महाशिवरात्रि पर हिमाचल में हुई शादी
मिली जानकारी के अनुसार, यह विवाह 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर हिमाचल प्रदेश की शांत वादियों में संपन्न हुआ। शादी के बाद जब यह जोड़ा झज्जर स्थित अपने पैतृक गांव पहुँचा, तब ग्रामीणों और सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा शुरू हुई। अभय की माँ ने पारंपरिक रीति-रिवाजों, आरती और मिठाइयों के साथ नई बहू का स्वागत किया।
दोस्ती से हमसफर तक का सफर
बेंगलुरु में कार्यरत इंजीनियर प्रतिका ने बताया कि उनकी और अभय की मुलाकात करीब एक साल पहले हुई थी। उन्होंने कहा, “शुरुआत में हम सिर्फ दोस्त थे, लेकिन धीरे-धीरे हमारी विचारधारा मिली और यह दोस्ती प्यार में बदल गई। अभय एक बेहद सरल, ईमानदार और सच्चे इंसान हैं।”
IIT की पढ़ाई छोड़ अध्यात्म की राह
अभय सिंह का सफर काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT बॉम्बे में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। मुंबई में चार साल बिताने के बाद, उनका मन विज्ञान से ऊब गया और उन्होंने कला (Arts) और फोटोग्राफी की ओर रुख किया। अंततः, सत्य की खोज में वे पूर्णतः अध्यात्म से जुड़ गए और भगवान शिव के अनन्य भक्त बन गए।
‘IIT Baba’ अभय का मानना है कि:
“विज्ञान भौतिक दुनिया की व्याख्या करता है, लेकिन जीवन की गहरी समझ अंततः व्यक्ति को अध्यात्म की ओर ही ले जाती है। संस्कृत की रचना और मन की शांति की खोज ने मुझे इस मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।”
भविष्य का लक्ष्य: आधुनिक शिक्षा और सनातन का मेल
शादी के बाद इस जोड़े ने अपने भविष्य के नेक इरादों को भी साझा किया। वे एक ऐसी ‘सनातन यूनिवर्सिटी’ (Sanatan-focused University) स्थापित करना चाहते हैं जहाँ आधुनिक विज्ञान और तकनीक की शिक्षा के साथ-साथ प्राचीन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों का भी पाठ पढ़ाया जाए। उनका लक्ष्य युवाओं को मानसिक शांति और आधुनिक प्रगति के बीच संतुलन बनाना सिखाना है।