Lightning Strike : गुरुग्राम में आसमानी बिजली का कहर, मकान की छत ढहने से मलबे में दबा 9 साल का मासूम, हालत गंभीर
पटौदी के वार्ड 14 में हुआ बड़ा हादसा, सीटी स्कैन के लिए बच्चे को किया गया रेफर, बेबस पिता बोला-सब कुछ खत्म हो गया

Lightning Strike : साइबर सिटी गुरुग्राम के पटौदी इलाके से एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहाँ खराब मौसम के बीच आसमानी बिजली गिरने से एक गरीब परिवार का आशियाना उजड़ गया। पटौदी नगर के वार्ड नंबर 14 में वीरवार शाम को अचानक कड़कड़ाती हुई बिजली एक मकान पर आ गिरी। इस आकाशीय बिजली के तेज झटके से मकान की सीमेंटेड चादरों से बनी छत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। हादसे के वक्त कमरे में मौजूद 9 वर्षीय मासूम बच्चा मलबे की चपेट में आ गया, जिसकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई है।
कमरे में बैठा था मासूम, अचानक काल बनकर गिरी बिजली : Lightning Strike
मिली जानकारी के अनुसार, वार्ड 14 के निवासी मुबारक का 9 वर्षीय बेटा फरहान हादसे के समय कमरे के भीतर बेड पर बैठा हुआ था। तभी अचानक एक जोरदार धमाके के साथ आसमानी बिजली सीधे उनके मकान पर आ गिरी। बिजली का झटका इतना जोरदार था कि छत का एक बड़ा हिस्सा टूटकर सीधे मासूम फरहान के ऊपर गिर गया। धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग और परिजन तुरंत मौके पर भागे। स्वजनों ने मुस्तैदी दिखाते हुए आनन-फानन में मलबे को हटाया और खून से लथपथ तड़प रहे फरहान को बाहर निकाला।
सिर पर आए 15 टांके, हालत नाजुक होने पर रेवाड़ी रेफर : Lightning Strike
परिजन मासूम को बिना वक्त गंवाए तुरंत पास के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के दौरान बच्चे के सिर पर आए गहरे जख्मों को देखते हुए 15 टांके लगाए। हालांकि, बच्चे की गंभीर स्थिति और अंदरूनी चोटों की आशंका को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे सीटी स्कैन और बेहतर इलाज के लिए तुरंत रेवाड़ी रेफर कर दिया है। फिलहाल बच्चा डॉक्टरों की निगरानी में है और उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।
एकमात्र आशियाना भी छिना, अब सिर्फ सरकारी मदद का सहारा
इस कुदरती आपदा ने पीड़ित परिवार को दोहरी मार दी है। एक तरफ जहाँ उनका इकलौता बेटा अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ उनके सिर से छत भी छिन गई है। पीड़ित पिता मुबारक ने रुआंसे गले से बताया, “हमारे पास रहने के लिए सिर्फ यही एक कमरा था, जो अब पूरी तरह तबाह हो चुका है। आर्थिक स्थिति पहले से ही बहुत खराब है, ऐसे में न तो बेटे के इलाज के पैसे हैं और न ही दोबारा छत डलवाने की हैसियत।”
इस दर्दनाक हादसे के बाद बेघर हुए पीड़ित परिवार ने स्थानीय प्रशासन और सरकार से इलाज और पुनर्वास के लिए तुरंत आर्थिक सहायता प्रदान करने की गुहार लगाई है।