Gurugram: सुप्रीम कोर्ट ने Chintel society के असुरक्षित तीन टावरों को खाली करने पर रोक


Gurugram News Network – सुप्रीम कोर्ट ने आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जिला उपायुक्त अजय कुमार के सेक्टर-109 स्थित चिंटल पैराडाइसो सोसाइटी के तीन टावर को खाली करने के आदेश पर रोक लगा दी है। जिला उपायुक्त ने अपने आदेश में तीन टावर में रह रहे करीब 150 फ्लैट मालिकों के लिए विकल्प एक और दो के चयन को लेकर कोई जिक्र नहीं किया था।n
किराया और स्थानांतरण शुल्क के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी थी। इसके विरोध में आरडब्ल्यूए प्रतिनिधिमंडल ने जिला उपायुक्त से मुलाकात की थी। जब कोई रास्ता नहीं निकला तो फ्लैट मालिकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी। सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई नौ अप्रैल निर्धारित है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हरियाणा सरकार और चिंटल इंडिया लिमिटेड को पक्ष रखने के आदेश जारी किए हैं।
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गत 19 मार्च को जिला उपायुक्त अजय कुमार ने चिंटल पैराडाइसो सोसाइटी के ए, बी और सी टावर को खाली करने के आदेश निकाल दिए। दो पेज के इस आदेश में बताया गया कि केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) ने इन तीनों टावर को सरंचनात्मक जांच में असुरक्षित पाया है। 192 फ्लैट के इन तीन टावर में रह रहे 150 परिवारों को 15 दिन के अंदर फ्लैट खाली करने का समय आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत दिया गया।
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आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों ने कहा कि इस आदेश में विस्थापित करने और मुआवजा देने की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। इस आदेश का फायदा उठाकर चिंटल इंडिया लिमिटेड मनमानी पर उतर आई है। अब उनकी तरफ से सिर्फ मुआवजा देने की बात कही जा रही है। विस्थापित करने की बात (फ्लैट के बदले फ्लैट देने की बात) से इंकार किया जा रहा है। दबी जुबान में कुछ फ्लैट मालिकों ने यहां तक आरोप लगाए कि चिंटल इंडिया लिमिटेड के इशारे पर जिला प्रशासन इस तरह के आदेश पारित किए हैं।
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nचिंटल पैराडाइसो सोसाइटी में नौ टावर हैं। डी टावर में 10 फरवरी, 2022 को छह फ्लैट के ड्राइंग रूम की छत गिर गई थी, जिसमें दो महिलाओं की मौत हो गई थी। इन सभी टावर की सरंचनात्मक जांच हुई थी। इसमें सभी टावर को रहने के लिए आईआईटी दिल्ली और सीबीआरआई ने असुरक्षित बताया है।
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