Gurugram Politics : भाजपा का गुरुग्राम नगर निगम में दबदबा, सात बागी पार्षदों की वापसी से सियासी समीकरण बदले
पार्टी में शामिल होने के बाद नगर निगम गुरुग्राम में डिप्टी मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर के पद को लेकर भी दावेदारी बढ़ गई है। ऐसे में डिप्टी मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर के पद के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।

Gurugram Politics : गुरुग्राम नगर निगम में भाजपा ने अपनी राजनीतिक पकड़ और मजबूत कर ली है। हाल ही में हुए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में सात बागी पार्षदों ने पार्टी में वापसी कर ली है। इन पार्षदों ने पिछले चुनावों में भाजपा से बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। इन पार्षदों की वापसी से गुरुग्राम की स्थानीय राजनीति में नए समीकरण बन गए हैं, जिससे आगामी समय में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
वहीं पार्टी में शामिल होने के बाद नगर निगम गुरुग्राम में डिप्टी मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर के पद को लेकर भी दावेदारी बढ़ गई है। ऐसे में डिप्टी मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर के पद के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।

सात पार्षदों की वापसी को केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के खेमे की राजनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। सभी पार्षद राव इंद्रजीत सिंह के समर्थक माने जाते हैं। इस वापसी के बाद नगर निगम में भाजपा पार्षदों की कुल संख्या 31 हो गई है।
मूल चुनाव में भाजपा ने 24 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि 10 निर्दलीय और एक-एक सीट कांग्रेस और जेजेपी के खाते में गई थी। सात निर्दलीय पार्षदों की वापसी से भाजपा का संख्या बल बढ़ गया है, जिससे पार्टी सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों पर आसानी से कब्जा कर सकती है।

जिन सात पार्षदों ने भाजपा में वापसी की है, उनमें परमिंदर कटारिया, प्रदीप कुमार पदम, महावीर यादव, दिनेश दहिया, अवनीश राघव, सारिका प्रशांत भारद्वाज और रुचि गगनदीप किल्होड़ शामिल हैं। इन पार्षदों में से परमिंदर कटारिया पहले डिप्टी मेयर के पद पर रह चुके हैं। इस घटनाक्रम ने गुरुग्राम की राजनीति में हलचल मचा दी है।
एक तरफ जहां राव इंद्रजीत सिंह के खेमे को मजबूती मिली है, वहीं दूसरी तरफ कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह का खेमा भी सक्रिय हो गया है। इस घटनाक्रम के बाद दोनों खेमों के बीच राजनीतिक टकराव की संभावना बढ़ गई है। आने वाले समय में गुरुग्राम की राजनीति में यह टकराव देखने को मिल सकता है।

यह राजनीतिक बदलाव दर्शाता है कि भाजपा गुरुग्राम में अपनी पकड़ और मजबूत करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। सात बागी पार्षदों की वापसी ने पार्टी को न केवल संख्या बल दिया है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी सशक्त किया है।










