Gurugram News :अरावली में अवैध निर्माण पर शिकंजा,अंसल ग्रुप और राजस्व अधिकारियों पर FIR
आरोप है कि उन्होंने 1995 में राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर "गैर-मुमकिन पहाड़" (गैर-खेती योग्य पहाड़ी) की श्रेणी वाली जमीन को "फार्महाउस", "सड़कों" और "घरों" में बदल दिया। यह सब अरावली अधिसूचना का उल्लंघन करते हुए किया गया था।

Gurugram News : अरावली पहाड़ियों में अवैध रूप से फार्महाउस विकसित करने के मामले में एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) गुरुग्राम ने 10 साल की लंबी जांच के बाद आखिरकार केस दर्ज कर लिया है। यह कार्रवाई अंसल हाउसिंग और उसकी सहयोगी कंपनियों के साथ-साथ तत्कालीन पटवारी और राजस्व विभाग के अधिकारियों के खिलाफ की गई है।
इन पर आरोप है कि उन्होंने 1995 में राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर “गैर-मुमकिन पहाड़” (गैर-खेती योग्य पहाड़ी) की श्रेणी वाली जमीन को “फार्महाउस”, “सड़कों” और “घरों” में बदल दिया। यह सब अरावली अधिसूचना का उल्लंघन करते हुए किया गया था।

15 सितंबर, 2015 को सामाजिक कार्यकर्ता राज करण की शिकायत पर शुरू हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से कई कंपनियों ने गैर-परिवर्तनीय भूमि को अवैध रूप से फार्महाउस और सड़कों में बदल दिया, जिससे 7 मई, 1992 की अरावली अधिसूचना का उल्लंघन हुआ।
सामाजिक कार्यकर्ता रामचरण शुक्ला ने भी इसी तरह की शिकायत में कहा था कि प्रभावशाली लोग और भू-माफिया रायसीना, सोहना में अरावली पहाड़ियों पर हरे-भरे जंगल काट रहे थे और करोड़ों रुपये में जमीन बेच रहे थे।

जांच में पता चला कि 1990-91 के रिकॉर्ड के अनुसार, अंसल हाउसिंग की सहायक कंपनियों ने “अंसल अरावली रिट्रीट प्रोजेक्ट” के तहत लगभग 1200 एकड़ जमीन खरीदी थी। तत्कालीन पटवारी राय सिंह ने 1994-95 में 1990-91 के रिकॉर्ड तैयार करते समय “गैर-मुमकिन पहाड़” को बदलकर फार्महाउस, सड़कें और इमारतें दर्ज कर दिया था।
पटवारी राय सिंह, अंसल ग्रुप और उसकी सहायक कंपनियों के साथ मिलीभगत करके, पद का दुरुपयोग करते हुए रिकॉर्ड में यह हेरफेर किया था।
अंसल ग्रुप ने इस भूमि पर फार्महाउस बनाकर उन्हें बेच दिया, जिससे अरावली अधिसूचना का स्पष्ट उल्लंघन हुआ। इस मामले में अंसल हाउसिंग और उसकी सहयोगी कंपनियों, तत्कालीन पटवारी राय सिंह और अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ IPC की धारा 167, 218, 420, 120B के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई अवैध भूमि विकास के खिलाफ एक बड़ा कदम मानी जा रही है।










