जाको राखे साइयां मार सके न कोय: झाड़ियों में मिली ‘नन्ही जान’ को मिला नया जीवन और एक प्यारा सा नाम Baby Max

अस्पताल में 'Baby Max' बना सबका लाडला; झाड़ियों में लावारिस मिले नवजात के लिए देवदूत बना मेडिकल स्टाफ

Baby Max : कहते हैं कि जब अपने ठुकरा देते हैं, तो पूरी दुनिया हाथ थामने के लिए आगे आ जाती है। गुरुग्राम के सुनसान इलाके की झाड़ियों में ठंड से ठिठुरते हुए मिले उस मासूम के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। जिस बच्चे को उसके माता-पिता ने मरने के लिए छोड़ दिया था, आज वह अस्पताल के एनआईसीयू (NICU) वार्ड की जान बना हुआ है। अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों ने न केवल इस बच्चे को नई जिंदगी दी है, बल्कि उसे बड़े ही लाड-प्यार से ‘बेबी मैक्स’ (Baby Max) नाम भी दिया है।

अस्पताल का स्टाफ बना परिवार जब पुलिस इस नवजात ‘बेबी मैक्स’ (Baby Max) को लगभग बेजान हालत में अस्पताल लेकर पहुँची थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि वह इतनी जल्दी रिकवर करेगा। समय से पूर्व जन्मे इस बच्चे की नाजुक हालत को देखते हुए मेडिकल स्टाफ ने इसे अपनी विशेष निगरानी में रखा। धीरे-धीरे जब बच्चे की सेहत में सुधार होने लगा, तो वहां की नर्सों और डॉक्टरों का उससे भावनात्मक लगाव हो गया। स्टाफ ने प्यार से उसे ‘मैक्स’ बुलाना शुरू कर दिया, जो अब पूरे वार्ड में इसी नाम से पहचाना जा रहा है।

मौत को मात देकर ‘बेबी मैक्स’ (Baby Max) ने दिखाई जीने की जिद्द ‘बेबी मैक्स’ का वजन जन्म के समय बहुत कम था और बाहर के असुरक्षित वातावरण के कारण उसे गंभीर संक्रमण का खतरा था। लेकिन अस्पताल के आधुनिक एनआईसीयू वार्ड में मिली देखभाल और डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई। स्टाफ का कहना है कि मैक्स एक ‘फाइटर’ है। वह जिस तरह से मुस्कुराता है और अपनी छोटी-छोटी उंगलियों से नर्सों का हाथ थामता है, उसे देख हर कोई भावुक हो जाता है।

जांच और कानूनी प्रक्रिया एक तरफ जहाँ अस्पताल में ‘बेबी मैक्स’ को ममता मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ गुरुग्राम पुलिस उस निर्दयी व्यक्ति की तलाश में जुटी है जिसने उसे झाड़ियों में फेंका था। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और इलाके के सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच की जा रही है।

आगे की राह डॉक्टरों के अनुसार, जब ‘बेबी मैक्स’ पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगा और उसका वजन सुरक्षित स्तर तक पहुँच जाएगा, तब उसे बाल कल्याण समिति (CWC) को सौंप दिया जाएगा। फिलहाल, अस्पताल का हर कर्मचारी उसकी देखभाल एक माता-पिता की तरह कर रहा है। ‘बेबी मैक्स’ की यह कहानी आज हर किसी की जुबान पर है, जो हमें बताती है कि बुराई चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, इंसानियत की जीत हमेशा होती है।

Manu Mehta

मनु मेहता पिछले लगभग 18 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों (ANI News, News Express, TV 9,… More »
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