Gurugram Metro : 8 तीव्रता वाला भूकंप भी नहीं हिला पाएगा मेट्रो की नींव, सिस्मिक जोन-4 के तहत तैयार हो रहा डिजाइन
अब स्पष्ट हो गया है कि निर्माण कार्य सिस्मिक जोन-4 के मानकों के अनुसार ही होगा। इससे पहले से तैयार स्ट्रक्चरल डिजाइन के आधार पर पिलर और गर्डर बनाने का काम अब तेज गति से आगे बढ़ सकेगा।

Gurugram Metro : मिलेनियम सिटी की महत्वाकांक्षी ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो परियोजना न केवल शहर की रफ्तार बढ़ाएगी, बल्कि सुरक्षा के मामले में भी मिसाल पेश करेगी। गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) के अनुसार, मेट्रो के सिविल स्ट्रक्चर को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि वह 7.9 से 8 तीव्रता तक के भीषण भूकंप के झटकों को आसानी से सहन कर सके। सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक इंजीनियरिंग और विशेष सेफ्टी कोड का इस्तेमाल किया जा रहा है।
जीएमआरएल के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील है, जिसे सिस्मिक जोन-4 में रखा गया है। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा इस क्षेत्र को सिस्मिक जोन-5 में शामिल किए जाने की चर्चाओं के बीच डिजाइन में बदलाव की संभावना बनी थी, जिससे पिलर की मोटाई और निर्माण की लागत बढ़ने के कारण काम में देरी हो रही थी।
हालांकि, अब स्पष्ट हो गया है कि निर्माण कार्य सिस्मिक जोन-4 के मानकों के अनुसार ही होगा। इससे पहले से तैयार स्ट्रक्चरल डिजाइन के आधार पर पिलर और गर्डर बनाने का काम अब तेज गति से आगे बढ़ सकेगा।
गुरुग्राम का इलाका सोहना फॉल्ट लाइन के करीब है, जो जमीन के भीतर टेक्टोनिक प्लेटों की एक बड़ी दरार है। इस खतरे को देखते हुए मेट्रो के पिलर और गर्डर निर्माण में उच्च स्तर की भूकंपरोधी तकनीक (Earthquake-resistant technology) अपनाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
परियोजना का वर्तमान स्टेटस :
कुल लंबाई: मिलेनियम सिटी सेंटर से साइबर सिटी तक लगभग 27.05 किमी।
पहला चरण: मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर-9 तक निर्माण कार्य जारी।
मुख्य फोकस: वर्तमान में पिलर निर्माण की प्रक्रिया चल रही है, जहाँ टिकाऊपन और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।