Gurugram Court : साड़ी चोरी के मामूली शक में हत्या, लाइसेंसी राइफल वाले गार्ड को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद

अदालत का यह फैसला यह स्पष्ट संदेश देता है कि चाहे विवाद कितना भी छोटा क्यों न हो, लाइसेंसी हथियार का व्यक्तिगत प्रतिशोध के लिए इस्तेमाल करना एक अक्षम्य अपराध है, जिसकी कीमत आरोपी को अपनी पूरी जिंदगी जेल में बिताकर चुकानी होगी।

Gurugram Court : एक मामूली विवाद और लाइसेंसी हथियार के घातक दुरुपयोग ने 29 वर्षीय युवक की जान ले ली, जिसके परिणाम स्वरूप माननीय अदालत ने आरोपी को कड़ा दंड सुनाया है। गुरुग्राम के एडिशनल सेशन जज श्री सुनील कुमार देवन की अदालत ने मंगलवार को 50 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड अजय सिंह को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला साबित करता है कि निजी रंजिश में हथियार का इस्तेमाल करने वालों के साथ कानून सख्ती से निपटेगा।

यह  घटना 15 अगस्त 2023 को नाथूपुर गाँव में हुई थी, जहाँ अजय सिंह और मृतक पिंटू कुमार दोनों सिक्योरिटी गार्ड के रूप में एक ही मोहल्ले में किराए पर रहते थे।

मामले की शुरुआत अत्यंत मामूली थी: अजय सिंह की पत्नी ने अपने पति को बताया कि उनकी साड़ी चोरी हो गई है, और उन्हें शक था कि यह काम पड़ोसी पिंटू कुमार ने किया है। 15 अगस्त को जब अजय सिंह अपनी ड्यूटी के लिए घर से निकल रहा था, तो उसने पिंटू को रोककर चोरी के शक पर बहस शुरू कर दी।

बहस जल्द ही झगड़े में बदल गई। पुलिस पूछताछ के अनुसार, गुस्से में आकर मृतक पिंटू ने कथित तौर पर अजय सिंह को थप्पड़ मार दिया। इस अपमान से भड़के अजय सिंह ने तुरंत अपनी लाइसेंसी डोगा 12 बोर राईफल निकाली और पिंटू कुमार पर फायर कर दिया। गोली पिंटू के पेट में लगी। उसे तत्काल डीएलएफ फेज-III के नारायणा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

घटना के अगले ही दिन 16 अगस्त 2023 को, अपराध शाखा सिकंदरपुर के प्रभारी निरीक्षक प्रवीन कुमार की टीम ने आरोपी अजय सिंह (निवासी कासगंज, यूपी) को नाथूपुर से गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त राईफल और खाली खोल सहित उसका आर्म्स लाइसेंस भी जब्त कर लिया था।

पुलिस द्वारा प्रस्तुत किए गए ठोस साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर, अदालत ने आरोपी अजय सिंह को दोषी ठहराया और दोहरी सजा सुनाई:

  1. धारा 302 IPC (हत्या): आजीवन कारावास (उम्रकैद) और 50,000 रुपये का जुर्माना।
  2. धारा 27(1) आर्म्स एक्ट: 07 साल की कठोर कैद और 25,000 रुपये का जुर्माना।

अदालत का यह फैसला यह स्पष्ट संदेश देता है कि चाहे विवाद कितना भी छोटा क्यों न हो, लाइसेंसी हथियार का व्यक्तिगत प्रतिशोध के लिए इस्तेमाल करना एक अक्षम्य अपराध है, जिसकी कीमत आरोपी को अपनी पूरी जिंदगी जेल में बिताकर चुकानी होगी।

Manu Mehta

मनु मेहता पिछले लगभग 18 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों (ANI News, News Express, TV 9,… More »
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