बिना विदेश जाए मिलेगी UK की डिग्री: Gurugram में खुला साउथेम्प्टन यूनिवर्सिटी का कैंपस, इन 6 कोर्सेज में एडमिशन शुरू
अंडरग्रेजुएट (UG) में दाखिले के लिए छात्रों को कक्षा 12वीं में अच्छे अंकों (लगभग 78% या अधिक) के साथ-साथ अंग्रेजी दक्षता (IELTS स्कोर 6.5) की आवश्यकता होगी। पोस्टग्रेजुएट (PG) में दाखिले के लिए संबंधित विषय में स्नातक की डिग्री अनिवार्य है।

Gurugram : भारत की नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत वैश्विक शिक्षा के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया है। दुनिया की टॉप-100 यूनिवर्सिटीज में शुमार ब्रिटेन की साउथेम्प्टन यूनिवर्सिटी (University of Southampton) ने आधिकारिक तौर पर गुरुग्राम (हरियाणा) में अपना कैंपस शुरू कर दिया है। यह पहली बार है जब Russell Group की कोई यूनिवर्सिटी भारत में अपना पूर्ण विकसित कैंपस संचालित कर रही है।
इन 6 कोर्सेज से होगी शुरुआत
यूनिवर्सिटी ने अपने पहले शैक्षणिक सत्र के लिए उन कोर्सेज को चुना है जिनकी ग्लोबल मार्केट में भारी मांग है। फिलहाल ये कोर्सेज उपलब्ध हैं।
BSc कंप्यूटर साइंस (BSc Computer Science)
BSc बिजनेस मैनेजमेंट (BSc Business Management)
BSc अकाउंटिंग एंड फाइनेंस (BSc Accounting and Finance)
BSc इकोनॉमिक्स (BSc Economics)
MSc इंटरनेशनल मैनेजमेंट (MSc International Management)
MSc फाइनेंस (MSc Finance)
कैंपस में प्रवेश पूरी तरह से मेरिट और शैक्षणिक रिकॉर्ड पर आधारित है।

अंडरग्रेजुएट (UG) में दाखिले के लिए छात्रों को कक्षा 12वीं में अच्छे अंकों (लगभग 78% या अधिक) के साथ-साथ अंग्रेजी दक्षता (IELTS स्कोर 6.5) की आवश्यकता होगी। पोस्टग्रेजुएट (PG) में दाखिले के लिए संबंधित विषय में स्नातक की डिग्री अनिवार्य है।
पहली बार आवेदन करने वाले छात्रों के लिए कुछ विशेष छूट के साथ आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल (southampton.ac.uk/in) पर शुरू हो चुकी है।
गुरुग्राम कैंपस की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ मिलने वाली डिग्री और ट्रांसक्रिप्ट बिल्कुल वैसी ही होगी जैसी ब्रिटेन के मुख्य कैंपस में मिलती है। इसमें यह उल्लेख नहीं होगा कि पढ़ाई भारत में हुई है। भारतीय छात्रों के लिए फीस: UG कोर्सेज के लिए सालाना फीस करीब 13.2 लाख से 13.8 लाख रुपये के बीच है। मेधावी छात्रों के लिए यूनिवर्सिटी ने कई तरह की स्कॉलरशिप और वित्तीय सहायता की भी घोषणा की है।
इस कैंपस के शुरू होने से अब भारतीय छात्रों को लाखों रुपये खर्च करके विदेश जाने की जरूरत नहीं होगी। छात्र भारत में रहकर ब्रिटिश फैकल्टी और वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ उठा सकेंगे। साथ ही, छात्रों के पास पढ़ाई का एक हिस्सा (एक साल तक) ब्रिटेन या मलेशिया कैंपस में पूरा करने का विकल्प भी होगा।












