ED Action: NSG के पूर्व अधिकारी प्रवीण यादव और अन्य के खिलाफ PMLA कोर्ट ने लिया संज्ञान
ईडी ने यह जांच मानेसर पुलिस स्टेशन में प्रवीण यादव और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज 5 FIR के आधार पर शुरू की थी।

ED Action : प्रवर्तन निदेशालय (ED) गुरुग्राम अंचल कार्यालय द्वारा दायर की गई अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint – PC) पर गुरुग्राम की विशेष पीएमएलए (PMLA) कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को संज्ञान लिया है। यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG), मानेसर के पूर्व अधिकारी प्रवीण यादव और उनके परिवार के सदस्यों सहित कुल 12 व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA, 2002) के तहत दर्ज किया गया था।
ED ने यह शिकायत प्रवीण यादव, रितुराज यादव, ममता यादव, नवीन कुमार, कमल सिंह, दिनेश कुमार, किरणपाल यादव, और मेसर्स कोशिया एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स एसएस डेवलपर्स, मेसर्स मंगला स्पन पाइप इंडस्ट्रीज, मेसर्स सी हॉक सर्विसेज तथा मेसर्स श्री श्याम इंडस्ट्रीज के खिलाफ दायर की थी।
ईडी ने यह जांच मानेसर पुलिस स्टेशन में प्रवीण यादव और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज 5 FIR के आधार पर शुरू की थी।
ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि प्रवीण यादव, जो एनएसजी, मानेसर में टीम कमांडर सिक्योरिटी एंड लॉजिस्टिक्स और एससी एडमिनिस्ट्रेशन के पद पर प्रतिनियुक्ति पर तैनात थे, ने एक आपराधिक साजिश रची। उन्होंने NSG मानेसर के नाम पर जाली दस्तावेज तैयार किए और गुरुग्राम के एक्सिस बैंक में “EMD FOR CENTRAL WAREHOUSE NSG MANESAR” नाम से एक फर्जी बैंक खाता खोला।

इस साजिश में उनकी बहन श्रीमती रितुराज यादव ने उनकी मदद की, क्योंकि वह उसी बैंक शाखा में प्रबंधक के पद पर तैनात थीं।
अपनी साजिश के तहत, प्रवीण यादव ने एनएसजी, मानेसर के नाम से कई ठेकेदारों को जाली दस्तावेज जारी किए, जिसके माध्यम से उन्होंने विभिन्न गैर-मौजूद/फर्जी टेंडर आवंटित किए। इन फर्जी टेंडरों में सड़क निर्माण, तार फेंसिंग, स्ट्रीट लाइट, गोदाम निर्माण, दूध और अंडे की आपूर्ति, और आवासीय क्वार्टर निर्माण जैसे कार्य शामिल थे, जो वास्तव में एनएसजी, मानेसर में कभी मौजूद ही नहीं थे।
ईडी की जांच से पता चला कि इस कार्यप्रणाली (modus operandi) के जरिए प्रवीण यादव ने फर्जी बैंक खाते में लगभग 123.14 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime – POC) जमा की थी। प्रवीण यादव ने अपने परिवार के सदस्यों और अन्य सहयोगियों की मदद से इस POC का उपयोग विभिन्न चल और अचल संपत्तियों की खरीद के लिए किया।
ईडी ने अब तक 48.32 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां कुर्क की हैं, जिसकी पुष्टि निर्णायक प्राधिकारी (Adjudicating Authority) द्वारा की जा चुकी है। यह कार्रवाई संगठित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।












