Dwarka Expressway टोल शुरू होने पर 40 फीसदी तक कम हुए वाहन, वैकल्पिक रास्तों पर बढ़ा दबाव
टोल से बचने की इस कवायद ने स्थानीय और वैकल्पिक मार्गों पर दबाव बढ़ा दिया है। गुरुग्राम और दिल्ली के बीच चलने वाली कई स्कूल बसों ने अब द्वारका एक्सप्रेसवे का उपयोग बंद कर दिया है

Dwarka Expressway पर बिजवासन टोल प्लाजा पर शुल्क वसूली शुरू होते ही ट्रैफिक के पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, टोल लागू होने के बाद एक्सप्रेसवे से गुजरने वाले वाहनों की संख्या में लगभग 40 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
पहले यह संख्या रोजाना 90 हजार से एक लाख के बीच रहती थी, वहीं अब घटकर 60 से 62 हजार वाहनों तक सीमित हो गई है। यह गिरावट मंगलवार को और अधिक स्पष्ट दिखाई दी।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा रविवार को टोल वसूली शुरू करने के बाद से ही वाहन चालकों ने वैकल्पिक मार्गों की तलाश शुरू कर दी है।
टोल से बचने की इस कवायद ने स्थानीय और वैकल्पिक मार्गों पर दबाव बढ़ा दिया है। गुरुग्राम और दिल्ली के बीच चलने वाली कई स्कूल बसों ने अब द्वारका एक्सप्रेसवे का उपयोग बंद कर दिया है और दोबारा खस्ताहाल राघोपुर रोड का सहारा लेना शुरू कर दिया है। इस मार्ग पर गहरे गड्ढे और उड़ती धूल स्कूली बच्चों और अन्य यात्रियों के लिए गंभीर समस्या बन गई है।
व्यावसायिक वाहनों ने खेड़की दौला टोल प्लाजा के पास से एक्सप्रेसवे पर मुड़ने की बजाय टोल-मुक्त दिल्ली-जयपुर हाईवे की ओर रुख कर लिया है। इसके चलते दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर, विशेषकर सिरहौल बॉर्डर पर वाहनों की आवाजाही अचानक बढ़ गई है, जिससे यहाँ जाम की स्थिति बन सकती है।
एनएचएआई ने टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले निवासियों के लिए मासिक पास बनवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और रिहायशी सोसाइटियों में शिविर लगाए जा रहे हैं। इस संबंध में परियोजना अधिकारी ने जिला उपायुक्त कार्यालय से भी संपर्क साधा है। टोल संचालक कंपनी ने पास बनाने के लिए 10 लोगों को नियुक्त किया है और मौके पर उचित व्यवस्थाएँ की हैं।

एनएचएआई की ओर से 20 किलोमीटर के दायरे के निवासियों को दी गई तीन दिन की टोल-मुक्त छूट मंगलवार को समाप्त हो गई। इसका अर्थ है कि बुधवार से सभी वाहन चालकों से शुल्क वसूला जाएगा।
टोल प्लाजा पर टैग रीडर (फास्टैग स्कैनिंग मशीन) में तकनीकी दिक्कतें मंगलवार को भी जारी रहीं। सुबह और शाम के पीक आवर्स के दौरान वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा। एनएचएआई अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि आगामी एक सप्ताह के अंदर मशीनें सही ढंग से काम करना शुरू कर देंगी।











