Dwarka Expressway टोल शुरू होते ही वाहनों की संख्या घटी, 85 फीसदी तक वाहन हुए गायब
टोल प्लाजा शुरू होने का गुरुवार को पांचवां दिन था, लेकिन टैग रीडर की तकनीकी समस्या अब भी बनी हुई है। टैग रीडर के सही ढंग से काम न करने के कारण टोल कर्मियों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

Dwarka Expressway पर हाल ही में शुरू हुए बिजवासन टोल प्लाजा पर भारी और व्यावसायिक वाहनों की संख्या में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। टोल संचालन कर रही कंपनी के आंतरिक सर्वेक्षण से पता चला है कि टोल शुरू होने से पहले इस प्लाजा से रोजाना करीब 16,000 भारी वाहन गुजरते थे, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर केवल 2,000 के आसपास रह गई है। यह चौंकाने वाला आंकड़ा दर्शाता है कि लगभग 85 प्रतिशत ट्रकों और व्यावसायिक वाहनों ने टोल शुल्क से बचने के लिए अपना रूट बदल दिया है।
टोल संचालन कंपनी के लिए यह एक बड़ी चुनौती है, जिसने 9 नवंबर की सुबह 8 बजे से टोल वसूली शुरू की है। सर्वे के अनुसार, पहले प्लाजा से रोजाना करीब 90,000 हलके और भारी वाहनों का आवागमन होता था, जो अब घटकर 45,000 से 50,000 पर आ गया है। कंपनी ने टोल वसूली का ठेका 1.25 करोड़ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से तीन महीने के लिए लिया है, और भारी वाहनों की संख्या में इस बड़ी कमी के कारण कंपनी को भारी राजस्व घाटा होने की आशंका है।
करीब 14,000 भारी और व्यावसायिक वाहनों ने अब टोल प्लाजा से बचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। ये वाहन अब राघोपुर रोड या दिल्ली-जयपुर हाईवे पर सिरहौल बॉर्डर के रास्ते आवागमन कर रहे हैं। इन मार्गों पर वाहन चालकों को टोल शुल्क के बजाय केवल दिल्ली नगर निगम का पर्यावरण टैक्स देना पड़ता है, जिससे उनकी परिचालन लागत में काफी बचत हो रही है।
टोल कंपनी मासिक पास बनाने के लिए आवासीय सोसाइटियों में शिविर लगा रही है। अब तक लगभग चार हजार मासिक पास बनाए जा चुके हैं। हालांकि, गुरुवार को सेक्टर-110ए स्थित पुरी डिप्लोमैटिक ग्रींस सोसाइटी में लगे शिविर में टोलकर्मी के साथ बदसलूकी की घटना सामने आई। एक व्यक्ति ने कर्मचारी के साथ गाली-गलौज की, जिसके बाद टीम को शिविर बंद कर वापस लौटना पड़ा। इस घटना के मद्देनजर, कंपनी ने एनएचएआई से आग्रह किया है कि भविष्य के शिविरों के दौरान पुलिस कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
टोल प्लाजा शुरू होने का गुरुवार को पांचवां दिन था, लेकिन टैग रीडर की तकनीकी समस्या अब भी बनी हुई है। टैग रीडर के सही ढंग से काम न करने के कारण टोल कर्मियों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई बार टोल कर्मियों को बिना शुल्क वसूले ही वाहनों को आगे निकालना पड़ा। इसके अलावा, टैग की समयावधि खत्म होने या उनके ब्लैकलिस्ट होने के कारण भी वाहनों की कतारें लग रही हैं।
शुक्रवार को कंपनी ने सेक्टर-102 स्थित ज्वॉयविले, सेक्टर-99ए स्थित कनसेंट हैबिटेट, सेक्टर-108 स्थित एक्सपीरियन हार्टसांग सहित कई सोसाइटियों में पास बनाने के लिए शिविर लगाए हैं। शनिवार और रविवार को भी अलग-अलग सेक्टरों की सोसाइटियों में यह शिविर जारी रहेगा।












