डूरंड लाइन: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच खतरनाक सीमा

डूरंड लाइन दुनिया की सबसे खतरनाक सीमा मानी जाती है, जो अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच खींची गई है। यह सीमा न केवल भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से भी विवादित है। इस सीमा का कनेक्शन ब्रिटिश भारत से जुड़ा हुआ है, और यह 1893 में ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा बनाई गई थी। आज, यह सीमा पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संघर्ष और विवाद का कारण बन चुकी है, जहां दोनों देशों के बीच कई बार तनाव बढ़ चुका है। डूरंड लाइन का नाम ब्रिटिश अधिकारी सर हेनरी डूरंड के नाम पर रखा गया है, जो उस समय भारत सरकार के विदेश सचिव थे। इस सीमा को 1893 में ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के अमीरत के बीच खींचा गया था। इसका उद्देश्य अफगानिस्तान को ब्रिटिश भारत से अलग करना और भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की सुरक्षा को सुनिश्चित करना था। ब्रिटिश साम्राज्य ने अफगानिस्तान को अपनी प्रभावी सीमा के रूप में देखा और इसे इस तरह से खींचा कि दोनों देशों के बीच एक अलग और स्पष्ट सीमा रेखा बन जाए। डूरंड लाइन ने अफगानिस्तान को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थिति में लाकर ब्रिटिश साम्राज्य के लिए सुरक्षा प्रदान करने का काम किया। हालांकि, उस समय अफगानिस्तान के शासक ने इस सीमा को कभी स्वीकार नहीं किया, और इसे एक मजबूरन लागू की गई सीमा माना। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन को लेकर कई दशकों से विवाद चल रहा है। पाकिस्तान ने 1947 में भारत से स्वतंत्रता प्राप्त की, और डूरंड लाइन को पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के रूप में अपनाया। लेकिन अफगानिस्तान ने कभी भी इस सीमा को कानूनी रूप से स्वीकार नहीं किया और हमेशा इसे ब्रिटिश साम्राज्य का अवैध हस्तक्षेप माना। यह विवाद 1980 के दशक में और भी बढ़ गया, जब अफगानिस्तान में सोवियत संघ का हस्तक्षेप हुआ और पाकिस्तान ने अफगान मुजाहिदीन को समर्थन देना शुरू किया। इसके बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच इस सीमा को लेकर तनाव बढ़ गया। अफगानिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि डूरंड लाइन की स्थापना अफगान जनता की सहमति के बिना की गई थी और यह एक अवैध सीमा है। आज के समय में, डूरंड लाइन पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लिए एक जटिल राजनीतिक और सैन्य समस्या बन चुकी है। तालिबान के सत्ता में आने के बाद, अफगानिस्तान में और भी अधिक अस्थिरता आ गई है, और इस सीमा पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच अक्सर झड़पें होती रहती हैं। तालिबान ने बार-बार कहा है कि वह डूरंड लाइन को स्वीकार नहीं करेगा, जबकि पाकिस्तान इसे अपनी सीमा के रूप में मानता है। इस विवाद का एक बड़ा कारण यह है कि डूरंड लाइन ने अफगानिस्तान के कई जनजातीय क्षेत्रों को पाकिस्तान में मिला दिया है, जिसके कारण यहां के लोगों की पहचान और संस्कृति पर असर पड़ा है। पाकिस्तान के पास डूरंड लाइन के दक्षिण में बसे क्षेत्रों का नियंत्रण है, लेकिन अफगानिस्तान के लोग इन क्षेत्रों को अपनी भूमि मानते हैं और पाकिस्तान के खिलाफ संघर्ष करते हैं। तालिबान के सत्ता में आने के बाद, अफगानिस्तान ने डूरंड लाइन को लेकर अपनी स्थिति और भी मजबूत की है और पाकिस्तान से इसे रद्द करने की मांग की है। यह स्थिति दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव और संघर्ष को बढ़ा रही है, जिससे यहां के लोग प्रभावित हो रहे हैं।










