Money Laundering Case : हरियाणा के पूर्व MLA छोक्कर की जमानत याचिका खारिज, ED ने किया था गिरफ्तार
पूर्व विधायक के वकील ने अदालत में तर्क दिया था कि उनके बेटे सिकंदर सिंह (जो मुख्य व्यवसाय संभालते थे) को जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता (पैरिटी) के आधार पर उन्हें भी रिहा किया जाए।

Money Laundering Case : हरियाणा के समालखा से पूर्व कांग्रेस विधायक धर्म सिंह छोक्कर को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अदालत से बड़ा झटका लगा है। गुरुग्राम की विशेष पीएमएलए (PMLA) कोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। स्पेशल जज वाणी गोपाल शर्मा की अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद तथ्यों के आधार पर यह कतई नहीं कहा जा सकता कि आरोपी प्रथम दृष्टया निर्दोष है।
अदालत ने नियमित जमानत पर विचार करते हुए पीएमएलए की धारा 45 के तहत लागू ‘ट्विन कंडीशन’ (दोहरी शर्तों) का विशेष उल्लेख किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी को जमानत देने के लिए दो आधार होने जरूरी हैं पहला कि वह निर्दोष है और दूसरा कि वह बाहर जाकर अपराध नहीं करेगा। मौजूदा मामले में माहिरा ग्रुप की परियोजनाओं में फर्जी बैंक गारंटी और होम बायर्स के 360 करोड़ रुपये के कथित दुरुपयोग के गंभीर आरोपों को देखते हुए ये शर्तें पूरी नहीं होतीं।
पूर्व विधायक के वकील ने अदालत में तर्क दिया था कि उनके बेटे सिकंदर सिंह (जो मुख्य व्यवसाय संभालते थे) को जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता (पैरिटी) के आधार पर उन्हें भी रिहा किया जाए। हालांकि, अदालत ने इस दलील को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि आरोपी का जांच के दौरान असहयोग करना, बार-बार समन से बचना और गैर-जमानती वारंट जारी होने जैसे तथ्य उनके खिलाफ जाते हैं।
ईडी (ED) ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए सनसनीखेज आरोप लगाए। ईडी के अनुसार, धर्म सिंह छोक्कर ही परिवार के मुखिया हैं और माहिरा ग्रुप उन्हीं के प्रभाव में काम करता था। एजेंसी ने दावा किया कि घर खरीदारों के खून-पसीने की कमाई का उपयोग पूर्व विधायक ने अपनी बेटियों की शादी के आलीशान खर्चों और व्यक्तिगत संपत्तियां खरीदने के लिए किया।
दूसरी ओर, 62 वर्षीय छोक्कर के पक्ष ने कहा कि वे कंपनी में न तो निदेशक थे और न ही शेयरधारक। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि हरियाणा पुलिस ने मुख्य अपराध (Predicate Offence) में उन्हें निर्दोष पाया था और 60 दिनों के भीतर जांच पूरी किए बिना पूरक शिकायत दर्ज करना उनके कानूनी अधिकारों का उल्लंघन है।
फिलहाल, पूर्व विधायक भोंड़सी जेल में ही रहेंगे। अदालत ने साफ किया कि ये टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के संदर्भ में हैं और मुख्य मुकदमे के गुण-दोष पर इसका अंतिम प्रभाव नहीं पड़ेगा।