BIG News : नगर निकायों की बैठकों में पार्षद पतियों की एंट्री बैन, अब खुद मोर्चा संभालेंगी महिला जनप्रतिनिधि

सरकार का मानना है कि इस रोक से महिलाएं अपने वार्ड की समस्याओं को खुद सदन में रखेंगी, जिससे उनमें आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता (Leadership Skills) विकसित होगी।

BIG News : हरियाणा में महिला सशक्तिकरण को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक और सख्त कदम उठाया है। अब प्रदेश की नगर पालिकाओं, नगर परिषदों और नगर निगमों की बैठकों में महिला पार्षदों के स्थान पर उनके पति, भाई, बेटे या किसी भी पुरुष प्रतिनिधि के बैठने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

शहरी स्थानीय निकाय विभाग (ULB) द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, यदि कोई पुरुष प्रतिनिधि महिला पार्षद की जगह सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेता या हस्तक्षेप करता पाया गया, तो संबंधित पार्षद के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सरकार के संज्ञान में आया था कि ‘प्रतिनिधि प्रथा’ के कारण महिला आरक्षण का वास्तविक उद्देश्य विफल हो रहा है। अक्सर महिलाएं चुनाव तो जीत जाती हैं, लेकिन सदन के भीतर उनके अधिकारों और शक्तियों का इस्तेमाल उनके परिवार के पुरुष सदस्य करते हैं, जिन्हें बोलचाल की भाषा में ‘पार्षद पति’ या ‘सुपर पार्षद’ कहा जाता है। इस प्रथा को खत्म करने के लिए सरकार ने स्पष्ट किया है कि बैठकों में महिला सदस्य की स्वयं उपस्थिति अनिवार्य होगी। (BIG News)

सरकार का मानना है कि इस रोक से महिलाएं अपने वार्ड की समस्याओं को खुद सदन में रखेंगी, जिससे उनमें आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता (Leadership Skills) विकसित होगी। आदेश में यह भी कहा गया है कि नगर निगमों को हर महीने कम से कम एक बैठक और हर छह महीने में तीन दिन का विधिवत सत्र बुलाना अनिवार्य होगा।

नगर निगम गुरुग्राम (MCG) की अगली सदन बैठक 19 मार्च को होनी तय है। निगम प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस बैठक में किसी भी महिला पार्षद के प्रतिनिधि को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। बैठक की सूचना और कार्यवाही की रिपोर्ट अब संबंधित सांसदों और विधायकों को भेजना भी अनिवार्य कर दिया गया है ताकि पारदर्शिता बनी रहे। (BIG News)

Manu Mehta

मनु मेहता पिछले लगभग 18 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों (ANI News, News Express, TV 9,… More »
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