Bomb Threat : गुरुग्राम के एक और निजी स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी मिली मेल, मचा हड़कंप
बांग्लादेशी आरोपी की गिरफ्तारी के बाद भी सुरक्षित नहीं शिक्षण संस्थान; गुरुग्राम पुलिस ने चलाया घंटों सर्च ऑपरेशन।

Bomb Threat : साइबर सिटी के स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला बुधवार को सामने आया, जब गांव बालियावास स्थित एक नामी निजी स्कूल को बम से Bomb Threat संबंधित धमकी भरी ई-मेल प्राप्त हुई। इस सूचना के बाद स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों में भारी हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए गुरुग्राम पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए।

धमकी भरी मेल की सूचना मिलते ही पुलिस थाना डीएलएफ फेज-1 की टीम सक्रिय हो गई। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डॉग स्क्वॉड (Dog Squad) और बम निरोधक दस्ते (Bomb Disposal Squad) के साथ अन्य विशेष टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया। पुलिस ने तत्काल स्कूल परिसर, सभी कक्षाओं, प्रशासनिक भवनों और आसपास के खुले क्षेत्रों की गहनता से चेकिंग शुरू की।

घंटों चली इस सघन तलाशी के दौरान पुलिस ने चप्पे-चप्पे को खंगाला, हालांकि अब तक की जांच में किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई है।
इस संवेदनशील मामले पर जानकारी देते हुए पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार ने कहा:
“गुरुग्राम पुलिस द्वारा आम नागरिकों से अपील की जाती है कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें तथा कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें। गुरुग्राम पुलिस आपकी सुरक्षा के लिए पूर्णतः सतर्क व प्रतिबद्ध है।”
हैरानी की बात यह है कि अभी कुछ समय पहले ही गुरुग्राम पुलिस ने इस तरह की धमकियों (Bomb Threat) के पीछे के एक बड़े मामले का पर्दाफाश किया था। पुलिस ने 28 जनवरी को स्कूलों को बम की धमकी देने वाले एक बांग्लादेशी युवक को गिरफ्तार कर उस समय चल रहे मामलों की गुत्थी सुलझाई थी। उस बड़ी गिरफ्तारी के बाद माना जा रहा था कि स्थिति सामान्य हो जाएगी, लेकिन बालियावास के स्कूल को मिली इस नई मेल ने एक बार फिर पुलिस और प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
फिलहाल गुरुग्राम पुलिस ने पूरे परिसर को सुरक्षित घोषित कर दिया है, लेकिन मामले की जांच जारी है। साइबर सेल की टीमें ई-मेल के स्रोत और उसे भेजने वाले की पहचान करने में जुटी हैं ताकि यह साफ हो सके कि इस शरारत के पीछे कौन है?